गाजियाबाद। वादकारियों और अधिवक्ताओं की सुविधा के उद्देश्य से कोर्ट परिसर में स्थापित किया गया ई सुविधा केंद्र एक वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो सका है। इसका कारण बिजली का कनेक्शन नहीं मिल पाना है। हाईकोर्ट की निगरानी में तैयार यह केंद्र सभी जरूरी ढांचागत सुविधाओं से लैस है, लेकिन बिजली आपूर्ति न होने से इसका संचालन ठप पड़ा है। इससे न्यायिक कार्यों को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की योजना फिलहाल अधूरी नजर आ रही है।
कोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि ई सुविधा केंद्र के लिए बनाए गए पोटा केबिन का निर्माण जिस कंपनी द्वारा किया गया है, उसी को बिजली कनेक्शन की व्यवस्था भी करनी है। हालांकि कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि कोर्ट प्रशासन द्वारा बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इस आपसी समन्वय की कमी के कारण मामला अटका हुआ है। अधिकारी के अनुसार इस संबंध में उच्च न्यायालय इलाहाबाद को पत्र भेजा गया है और वहां से निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि नए वर्ष में ई फाइलिंग समेत अन्य सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।
ई सुविधा केंद्र का निर्माण मुंबई की एक विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा किया गया है। इसके शुरू होने से वर्चुअल कोर्ट से जुड़ी जानकारी, वाहन चालान का भुगतान, ई फाइलिंग, याचिकाओं की स्कैनिंग और ऑनलाइन स्टांप खरीद जैसी कई सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो जाएंगी। इससे वादकारियों और अधिवक्ताओं को अलग-अलग काउंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय की भी बचत होगी।
यह केंद्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है। कोर्ट प्रशासन का मानना है कि इसके संचालन से न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनेगी। शुरुआती चरण में केंद्र पर एक कंप्यूटर, एक स्कैनर और दो प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।
ई फाइलिंग कराने के लिए वादकारी को आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, डिजिटल हस्ताक्षर और शपथ पत्र के साथ उपस्थित होना होगा। इसके बाद डिजिटल फाइल तैयार कर फाइल नंबर जारी किया जाएगा। इसके अलावा केंद्र पर न्यायाधीशों की छुट्टियों से संबंधित जानकारी, ई स्टांप दस्तावेजों का मार्गदर्शन और निशुल्क विधिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। कोर्ट परिसर में मौजूद लोग अब इस केंद्र के जल्द शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।