स्थानीय निवासी प्रमोद चौधरी का कहना है कि एनएच-नौ से लगी इन कालोनियों में जलकल विभाग की ओर से पेयजल लाइन डाली गई है। नगर निगम की ओर से प्रत्येक कॉलोनियों में नलकूप लगाकर लोगों के घरों तक पाइपलाइन डाली गई। लोहामंडी में भी पाइपलाइन डाली गई है। पेयजल आपूर्ति होने पर यहां फैक्टरियों में काम करने वाले हजारों कर्मियों को फायदा होगा। बाजार से लोग पानी पीने का मजबूर हैं।
स्थानीय निवासी विकास सिंह का कहना है कि जगह-जगह पाइप लाइन शोपीस बनी हुई है। कई बार नगर निगम से मांग की गई कि पेयजल लाइन चालू कराई जाए लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। बाजार से पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी विनोद चौधरी का कहना है कि जब पाइप लाइन बिछाई गई तो दावा किया गया कि छह महीने में पेयजल आपूर्ति शुरू हो जाएगी। आठ महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हुई।
इन इलाकों में है पेयजल दिक्कत
महरौली, काजीपुरा, बयाना, नायफल, अकबरपुर बहरामपुर, सुदामापुरी, डूंडाहेड़ा, मैनापुर, आदर्शनगर, शांतिनगर समेत लाइनपार के कई क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल संकट बना हुआ है। लोग सबमर्सिबल या फिर बाजार से बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं। कई इलाके तो ऐसे हैं जहां पेयजल लाइन बिछाने के एक साल बाद भी अपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसके पीछे की वजह जलनिगम और नगर निगम में समन्वय का अभाव बताया जा रहा है।
टयूबवेल का टैंक बना डस्टबिन
महरौली में लगाए गए नलकूप के टैंक में पानी तो नहीं आया लेकिन देखते ही देखते टैंक डस्टबिन बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टैंक में गंदे कपड़े और कूड़े का ढेर भरा हुआ है। स्थनीय निवासी ब्रह्मपाल का कहना है कि पानी सिस्टम की लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
नलकूप के लिए जमीन नहीं मिलने से हो रही देरी
जलकल विभाग के महाप्रबंधक केपी आनंद का कहना है कि महरौली में एक नलकूप लगना है इसके लिए जमीन नहीं मिल रही है। जमीन के लिए स्थानीय पार्षद से मांग की गई है। नलकूप लगते ही पेयजल आपूर्ति शुरू हो जाएगी। स्थानीय पार्षद पवन गौतम का कहना है कि जमीन की व्यवस्था करा दी गई है। जलकल विभाग की ओर से देरी हो रही है। जलापूर्ति होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी।