डीएम निधि केसरवानी ने आठ टीमों के जरिए एक साथ 20 सीएचसी-पीएचसी का औचक निरीक्षण कराया। इस दौरान कहीं डॉक्टर गायब मिले तो कहीं पूरा स्टाफ ही नदारद था। डीएम ने सभी का एक दिन का वेतन काटने के आदेश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने मंगलवार को एक साथ 20 सामुदायिक और प्राथमिक केंद्रों का औचक निरीक्षण कराया। इसके लिए 11 अधिकारियों और अभियंताओं की टीम बनाकर सुबह आठ बजे औचक निरीक्षण कराया।
निरीक्षण के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोदीनगर, भोजपुर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुराना तथा नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पप्पू कालोनी व तिलकराम कालोनी में परिवार नियोजन का प्रचार-प्रसार नहीं हो रहा था।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोदीनगर, कैला भट्टा, तथा फर्रुखनगर लोनी, नगरीय स्वास्थ्य केंद्र साहिबाबाद व तिलकराम कालोनी तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुरादनगर पर संक्रमित मरीजों के लिए अलग से कक्ष नहीं था।
कई स्वास्थ्य केंद्र ऐसे थे, जहां गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पहले एचआईवी की अनिवार्य जांच ही नहीं की जा रही थी। इसके अलावा परिवार नियोजन रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं था। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोदीनगर व भोजपुर में स्टाफ की कमी मिली तथा नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फरीदनगर और पीएचसी नेहरू गार्डन बंद मिला।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोड़ा में चिकित्सक अनुपस्थित मिले। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोदीनगर और फर्रुखनगर लोनी पर भर्ती मरीजों को भोजन एवं दवाइयों की उचित व्यवस्था भी नहीं मिली। शाम को सभी अधिकारियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट डीएम को भेज दी।
रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने सीएमओ को आदेश दिया है कि अनुपस्थित पाए गए सभी चिकित्सकों और बंद मिले अस्पतालों के पूरे स्टाफ का एक दिन का वेतन काट लिया जाए।