नगर निगम में डीजल की चोरी का मामला फिर तूल पकड़ने लगा है। पार्षदों के बाद अब मेयर और नगर आयुक्त ने भी माना है कि निगम में बड़े स्तर पर डीजल की चोरी हो रही है। मेयर अब इस चोरी को रोकने के लिए निगम वाहन चालकों पर शिकंजा कसने के मूड में है। उन्होंने एक महीने में डीजल की इस बंदर बांट को रोकने का दावा किया।
शनिवार को अपने आवास पर पत्रकार वार्ता के दौरान महापौर अशु वर्मा ने कहा कि नगर निगम कूड़ा लिफ्टिंग के वाहनों के डीजल पर हर साल 15 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इन वाहनों की मेंटेनेंस पर निगम सालाना 3 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। उनका कहना है कि डीजल की चोरी की जा रही है।
वाहनों के चक्कर नहीं लगाए जा रहे और तीन-तीन ट्रिप का डीजल लिया जा रहा है। मेंटेनेंस के फर्जी बिल बनाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाए कि अगर वाहन चलाए जा रहे हैं तो शहर में जगह-जगह कूड़ा क्यों फैला हुआ है। महापौर का कहना है कि छुट्टियों के बाद वाहनों को मिलने वाले डीजल की समीक्षा होगी।
सुबह के समय औचक निरीक्षण कर धरपकड़ होगी और डीजल चोरी पकड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में डीजल और मेंटेनेंस के नाम पर धन की बर्बादी रोकी जाएगी। ड्राइवरों की संलिप्तता पाई जाने पर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ड्राइवरों के हाथों शहर को बदहाली की कगार पर नहीं पहुंचने दिया