ऑडी ऑटो भिड़ंत के मामले में पुलिस की कई लापरवाही सामने आ रही हैं। इशाक बनकर जिस दिन युवक ने सरेंडर किया, उस दिन जांच अधिकारी कोर्ट में मौजूद ही नहीं थे।चालक इशाक ने 30 जनवरी को कोर्ट में सरेंडर एप्लीकेशन फाइल की थी। मामला अज्ञात में दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने उसी दिन कोर्ट को आख्या भेजी कि इशाक ही मामले में वांछित है।
पुलिस ने इशाक की मोबाइल लोकेशन की जांच भी नहीं की, जिससे पहले ही यह साफ हो सकता था कि इशाक गाड़ी में था भी या नहीं। उधर, सरेंडर होने और जमानत मिलने के बाद भी पुलिस ने इशाक के दस्तावेजों के साथ लगी ड्राइविंग लाइसेंस की फोटोकॉपी की जांच नहीं है।
पुलिस को शक है कि सरेंडर कर कोर्ट में पेश होने वाले युवक ने कहीं से इशाक के ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी प्राप्त की और कोर्ट में पेश हो गया। एसपी सिटी सलमान ताज ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
जांच में अगर कहीं भी गड़बड़ी सामने आती है तो कार मालिक असिस्टेंट प्रोफेसर पर भी कार्रवाई की जाएगी। प्रोफेसर को पुलिस के सामने आकर घटना की सच्चाई बतानी चाहिए।