डाबर तालाब कालोनी में रहने वालों की जिंदगी ‘तालाब’ लील रहा है। इसका मुख्य कारण तालाब का पानी है, जो ओवरफ्लो होकर मकानों की नींव को खोखला कर रहा है। इससे फिर कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने तालाब की कई साल से सफाई नहीं कराई है।
तालाब के पानी के ओवरफ्लो होने से पांच साल पहले शुरू हुआ हादसों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अधिकांश हादसे बरसात के मौसम में होते हैं। अगस्त 2011 में अनवर अली के मकान की दीवार भरभरा कर गिर गई थी। गनीमत रही थी कि मकान बंद था और परिवार के सदस्य बाहर गए हुए थे।
लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन से तालाब के चारों ओर बाउंड्री बनवाने की मांग की गई है, मगर प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। एसडीएम प्रेम रंजन सिंह ने माना कि तालाब की काफी समय से सफाई नहीं हो सकी है।
उनका कहना है कि तालाब की सफाई, नाली और रास्तों की मरम्मत के लिए उन्होंने डीएम को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि जीडीए को भी पत्र भेजा जाएगा कि लोगों को जागरूक करें कि तालाब के पास पिलर पर मकान न बनाएं। आला अधिकारियों से बात कर तालाब के चारों ओर दीवार बनाने पर भी विचार किया जाएगा।
मकान के मलबे में परिवार को दबा देख चीखें भी नहीं निकल सकीं। यह कहना है जिंदगी और मौत से जूझ रहे घायल इमरान का।इमरान ने बताया कि वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर में थे। परिवार के कुछ सदस्य सोए हुए थे। अचानक मकान के दोनों ओर की दीवारें बाहर की तरफ गिर गईं।
इससे पहले वह कुछ समझ पाते छत घर में लेटे हुईं महिलाओं और बच्चों पर आ गिरी। उन्होंने बचाव के लिए पुकारने का प्रयास किया, लेकिन आवाज ने साथ नहीं दिया। वह अपने बचाव के लिए आसपास के लोगों को भी नहीं बुला सके। चंद सेकेंड बाद ही वह बेहोश हो गए। जब होश आया तो उन्होंने खुद को अस्पताल में पाया।
उनके बराबर वाले बेड पर अदनान, अमन और अनस घायल अवस्था में लेटे हुए थे। इमरान के पड़ोसी सलमान ने बताया कि वह घर में टीवी देख रहे थे। अचानक तेज धमाके की आवाज के साथ जमीन हिलती महसूस हुई। ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो। वह दौड़कर घर से बाहर निकले।
बाहर इमरान का मकान गिरा देखकर उन्होंने शोर मचा कर लोगों को मदद के लिए बुलाया। लोगों ने ईंटों को हटा कर घायल और शवों को मलबे से बाहर निकाला। पिछले दस साल से प्रशासन ने तालाब की सफाई नहीं कराई है।
तालाब की सफाई के लिए कई बार तहसील दिवस में शिकायतें दी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती। - सलीम अल्वी
यदि प्रशासनिक अधिकारी तालाब की सफाई पर ध्यान दिए होते तो कालोनी में हुए हादसों को टाला जा सकता था, लेकिन तालाब के सौंदर्यीकरण और सफाई की ओर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। - समीर भाटी