साहिबाबाद से रहस्यमय हालात में एक ट्रांसपोर्टर गायब हैं। पुलिस ने 17 दिन बाद भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है। पति की बरामदगी की मांग को लेकर बृहस्पतिवार सुबह ट्रांसपोर्टर की पत्नी, दो बेटियों और परिजनों के साथ एसपी सिटी कार्यालय पहुंचीं।
वहां पर मौजूद पुलिसकर्मियों से बेटियों ने रोते हुए अपने पापा को ढूंढकर लाने की मांग की। एसपी सिटी ने एएसपी साहिबाबाद को रिपोर्ट दर्ज कराकर ट्रांसपोर्टर की तलाश करने के निर्देश दिए हैं।
गायब ट्रांसपोर्टर लोके श भारद्वाज साहिबाबाद के वृंदावन गार्डन में रहते हैं। वे मूल रूप से हरियाणा के रोहतक के रहने वाले हैं। लोकेश की पत्नी खुशी हाउस वाइफ हैं। बेटी सृष्टि (9) दूसरी कक्षा में और निष्ठा (6) नर्र्सरी क्लास में पढ़ती है।
खुशी ने बताया कि एक मार्च की सुबह साढे़ दस बजे लोकेश घर से पैदल आंध्रा बैंक के लिए निकले थे। बैंक से चालीस हजार रुपये निकाल कर लाने थे, दोपहर बाद तक वह घर नहीं लौटे। मोबाइल पर कॉल की तो फोन बंद था।
दो मार्च को साहिबाबाद थाने में शिकायत की। पुलिस का दावा है कि उन्होंने गुमशुदगी दर्ज की थी, जबकि उन्होंने अपहरण का अंदेशा जताया था। आरोप है कि पुलिस ने न तो रिपोर्ट दर्ज की, न ही ट्रांसपोर्टर को तलाशने की कोशिश की।
उधर, लोकेश के गायब होने से उनकी बेटियों और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। एसपी सिटी से घटना की शिकायत करने बृहस्पतिवार को खुशी, सास मीना शर्मा, देवर अनूप शर्मा और दो बेटियों के साथ सुबह 11 पहुंचीं।
एसपी सिटी के कहने पर परिजन एएसपी साहिबाबाद से मिलने पहुंचे। पुलिस ने ट्रांसपोर्टर की सकुशल बरामदगी का आश्वासन दिया है। हालांकि देर शाम तक भी साहिबाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।
‘वो सुबह कब आएगी, जब पापा घर आएंगे’
खुशी ने बताया कि जब से लोकेश गायब हुए हैं, बेटियां न तो पढ़ाई करती हैं, न ही ठीक से कुछ खाती हैं। हर वक्त बस एक ही सवाल पूछती रहती हैं कि ‘पापा कब आएंगे।’ हर रात को यह दिलासा देकर बेटियों को सुलाती हैं कि ‘सो जाओ, पापा कल सुबह आ जाएंगे।’ यह दिलासा देते हुए 17 दिन बीत गए हैं, अब बेटियों को समझा पाना मुश्किल हो गया है।
न रंजिश, न फिरौती कॉल, कहां गए लोकेश
अनूप ने बताया कि उनके भाई लोकेश की किसी से रंजिश नहीं है। 17 दिन में उनके पास किसी ने फिरौती के लिए भी कॉल नहीं की है। लोकेश कहां हैं, किस हालत में हैं? इसके बारे में अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।