चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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नगर निकाय चुनाव के लिए किए गए वार्ड परिसीमन, ओबीसी गणना और अब उसके आधार पर तय किए गए वार्ड आरक्षण पर सवाल उठने लगे हैं। परिसीमन में कालोनियों का बंटवारा कई हिस्सों में कर दिए जाने से मौजूदा पार्षद परेशान हैं।
आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद वार्ड परिसीमन में बदलाव न हुआ तो अब कई पार्षद इसके खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।नगर निगम के नए परिसीमन के तहत कई वार्ड ऐसे है, जिनका विलय अन्य वार्डों में हो गया है। इससे कुछ नए वार्ड बन गए हैं तो कई का अस्तित्व खत्म हो गया है।
वर्तमान में वार्ड-7 के कई हिस्सों को अन्य वार्डों में शामिल कर दिया गया। स्थानीय पार्षद रजनेश चौधरी का कहना है कि पंचवटी कालोनी को दो वार्डों में शामिल कर दिया गया है। जबकि दूसरा बड़ा हिस्सा वार्ड-7 में जोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि यह जानबूझकर किया गया है। आपत्ति देने पर भी अफसरों ने सुनवाई नहीं की।
उनका कहना है कि वह हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करेंगे। इसी तरह संजय नगर और कैला भट्ठा क्षेत्र के वार्डों के बंटवारे में भी खामियां सामने आई हैं। कैला भट्ठा के पार्षद जाकिर सैफी ओबीसी गणना पर भी सवाल खड़े कर आपत्ति दर्ज करा चुके हैं।
उनका कहना है कि रैपिड सर्वे में ओबीसी की गणना अफसरों ने घर बैठकर कर दी है। ओबीसी गणना के आंकड़े सही नहीं है। उनका कहना है कि आपत्तियां मांगी जाएंगी तो वह डीएम को लिखित शिकायत देंगे। कई पार्षद गुपचुप इस परिसीमन, वार्ड आरक्षण को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।