मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ बुधवार को जैसे ही सीबीआई कोर्ट ने कुर्की के आदेश जारी किए, वैसे ही कुछ देर बाद कुशवाहा कोर्ट में पेश हो गए। कोर्ट ने आरोपी पूर्व मंत्री को न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया है।
कोर्ट ने पूर्व मंत्री की अंतरिम जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। हालांकि कुशवाहा की अपील पर विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने कुर्की आदेश पर दोबारा सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख नियत कर दी है।
एनआरएचएम घोटाले में फंसे यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा एक मामले में लंबे समय से कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे थे। इसी के चलते 30 जनवरी को विशेष न्यायाधीश ने पूर्व मंत्री के खिलाफ गैर जमानती वारंट और 82 की कार्रवाई के आदेश दिए थे।
बुधवार को इसी मामले के दूसरे आरोपी यूपी के ही पूर्व मंत्री अनंत कुमार उर्फ अंटू मिश्रा और दवा कारोबारी रईस आलम सिद्दीकी कोर्ट में पेश हुए, मगर बाबू सिंह कुशवाहा नहीं आए।
दोपहर बारह बजे तक कुशवाहा के कोर्ट में पेश न होने पर सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक बीके सिंह ने कोर्ट को बताया कि बाबू सिंह कुशवाहा अपनी संपत्ति को बेचने और हस्तांतरित करने की फिराक में है। लिहाजा आरोपी के खिलाफ कुर्की के आदेश जारी किए जाएं। इस पर विशेष न्यायाधीश ने कुशवाहा की संपत्ति कुर्क किए जाने का आदेश पारित कर दिया।
कुर्की का आदेश पारित होने के कुछ ही मिनट बाद आरोपी मंत्री कोर्ट में पेश हो गए और सरेंडर कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी अंतरिम जमानत और कुर्की आदेश वापस लेने की अर्जी कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट ने अंतरिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए कुर्की आदेश संबंधी अर्जी पर सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख नियत कर दी।