बसपा ने सांसद नरेंद्र कश्यप और पूर्व मंत्री हीरा लाल कश्यप को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। दोनों नेताओं के आपसी झगड़े में पार्टी को हो रहे नुकसान की वजह से बृहस्पतिवार को उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
हीरा लाल ने अपने बेटी की मौत पर उसके ससुर नरेंद्र कश्यप, सास देवेंद्री और पति डा. सागर समेत 6 के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। गाजियाबाद के संजयनगर निवासी नरेंद्र कश्यप बसपा के मौजूदा राज्यसभा सदस्य हैं। उनका कार्यकाल चार जुलाई को पूरा हो रहा है।
उनके बेटे डा. सागर की शादी वर्ष 2013 में बदायूं निवासी पूर्व मंत्री हीरा लाल कश्यप की बेटी हिमांशी से हुई थी। छह अप्रैल को हिमांशी की गाजियाबाद में अपनी ससुराल में ही संदिग्ध परिस्थिति में सिर में गोली लगने से मौत हो गई थी।
हीरा लाल ने नरेंद्र कश्यप व उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने नरेंद्र कश्यप, डा. सागर और देवेंद्री को गिरफ्तार कर लिया था।
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि नरेंद्र व हीरा लाल के आपसी झगड़े की वजह से पार्टी को हो रहे नुकसान को देखते हुए दोनों को पार्टी से निष्कासित किया गया है। सिद्दीकी ने कहा है कि हीरा लाल ने अपनी बेटी की मृत्यु को लेकर नरेंद्र कश्यप पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
यह जांच का विषय है। दोनों का विवाद इस समय न्यायालय में विचाराधीन है और दोनों ही बसपा से जुड़े हुए हैं। मृत्यु को लेकर भी वे एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इससे पार्र्टी की छवि खराब हो रही है। हीरा लाल, कश्यप समाज और मीडिया के माध्यम से जो रिपोर्ट मिल रही है, वह काफी चिंताजनक है। इसकी गंभीरता को देखते हुए नरेंद्र कश्यप और हीरा लाल कश्यप को बसपा से निष्कासित कर दिया गया है।
दांव पर लगा नरेंद्र और हीरालाल का राजनीतिक करियर
कविनगर थाना क्षेत्र के संजय नगर में छह अप्रैल 2016 को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हिमांशी कश्यप की मौत के बाद अब दो दिग्गज परिवारों की राजनीति पर भी ग्रहण लग गया है। बसपा में पूरब से लेकर पश्चिम तक कश्यप समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले नरेंद्र कश्यप और हीरालाल कश्यप के पार्टी से निष्कासन के साथ ही उनकी राजनीति पर भी अब संकट के बादल छा गए हैं।
बृहस्पतिवार को राज्यसभा सांसद नरेंद्र कश्यप के साथ ही हीरालाल कश्यप को भी बसपा सुप्रीमो के आदेश पर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। बसपा में पश्चिमी यूपी में जहां नरेंद्र कश्यप बसपा अपना दबदबा रखते थे, वहीं पूर्वी क्षेत्र में हीरालाल कश्यप पार्टी में अहम स्थान रखते थे।
बसपा ने नरेंद्र कश्यप को जहां पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव का पद देने के साथ ही राज्यसभा सांसद बनाया था, वहीं हीरालाल कश्यप को भी पार्टी ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। कश्यप समाज के यह दोनों ही कद्दावर बसपा सुप्रीमो मायावती के खास सिपहसलारों में गिने जाते थे।
यही कारण था कि पूर्व और पश्चिम में धमक रखने वाले इन दोनों कद्दावरों ने अपने बच्चों की शादी तय करके इस राजनीतिक पहचान को 2013 में रिश्तेदारी में बदल दिया था।
बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा अपने इन दोनों सिपहसलारों पर की गई निष्कासन की कार्यवाही के बाद से अब शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। नरेंद्र कश्यप पर पुत्रवधु की दहेज हत्या का आरोप है, इसलिए उन पर कार्रवाई हुई, मगर हीरालाल पर कार्रवाई बसपाइयों की समझ से भी परे है।
दबी जबान में चर्चा है कि विधानसभा चुनावों से पहले अचानक हुए इस कांड के बाद शुरू हुए आपसी झगड़े से पार्टी की छवि खराब हो रही थी। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता चाहते थे कि दोनों के बीच सुलह हो जाए, मगर उनकी बात को नकार दिया गया। इसी के चलते हीरालाल कश्यप को निष्कासन की कार्रवाई झेलनी पड़ी।
उधर सुलह समझौते की बात से हीरालाल कश्यप ने साफ इंकार किया है। उनका कहना था कि पार्टी की ओर से कभी सुलह-समझौते का कोई जिक्र नहीं हुआ। हां मगर उन्हें अपने निष्कासन पर हैरानी जरूर है।
हीरालाल का कहना था कि मेरी बेटी की हत्या हुई और मुझे ही पार्टी से निकाल दिया गया। इस मामले में वह पार्टी सुप्रीमो से समय लेकर उनके समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। पार्टी में आज भी उनकी पूरी निष्ठा है।