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कैरियर बनाने की उम्र में डासना जेल बना ‘घर’

Tue, 26 Apr 2016 01:32 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
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Jail
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इसे बेरोजगारी की मार कहें या शार्ट कट से लग्जरी लाइफ जीने का शौक। वजह चाहे जो हो, मगर युवा जो उम्र पढ़ाई या कैरियर बनाने में लगाते, वह सलाखों में गुजार रहे हैं। इन दिनों डासना जेल में सबसे ज्यादा युवा बंद हैं, जो मर्डर, रेप और लूट के आरोप में गिरफ्तार किए गए।
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3538 बंदियों में 3029 गाजियाबाद के हैं, जिनमें 1754 महज 20 से 30 साल उम्र केहैं। 18-19 साल उम्र के 182 हैं और 31-40 साल उम्र के 671। इसके अलावा 41-50 साल उम्र के 319 बंदी हैं। इनमें से 1094 पर हत्या का आरोप है, 377 पर रेप का। दहेज हत्या में 141 बंद हैं, लूट में 39।

डकैती के दौरान मर्डर के 14 आरोपी हैं। इनके अलावा बाकी आरोपी चोरी, भ्रष्टाचार, अवैध असलहे रखने और जानलेवा हमला आदि आरोपों में बंद हैं। जेल में बुजर्ग भी 100 के पार हैं। 60-70 साल उम्र के 81 बंदी हैं। 70 साल से ज्यादा उम्र के 22 बंदी हैं। इनमें अधिकांश दहेज केस में हैं।
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जेल अधीक्षक एसपी यादव ने बताया कि जेल में जो युवा पढ़ना चाहते हैं, उनकी मदद की जाती है। इग्नू के कई कोर्स कराए जाते हैं। फिलहाल 623 बंदी इग्नू के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं। इनके अलावा अनपढ़ बंदियों को भी साक्षर बनाया जा रहा है। उनकी भी क्लास चलाई जाती हैं।


‘अत्याधुनिक दौर में सुख सुविधाओं की चाह और धैर्य की कमी युवाओं को अपराध के दल-दल में धकेल रही है। जरायम की अंधेरी गलियों में गुमराह होते जा रहे हैं। यह समाज के लिए बेहद दुखद है।’
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                        - जेएल रैना, समाजशास्त्री
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