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खोड़ा में फर्जी कॉल सेेंटर का भंडाफोड़

Sat, 01 Oct 2016 12:41 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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लोन दिलाने और बीमा लोकपाल बन बीमा कंपनियों पर कार्रवाई करवाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खोड़ा पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। खोड़ा के ग्रीन इंडिया पैलेस में चल रहे कॉल सेंटर से पुलिस ने तीन युवक और युवतियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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इनके पास से 13 मोबाइल फोन, संचालकों की कई फर्जी आईडी, पैन कार्ड और 20 हजार की नगदी बरामद हुई है।     एसपी सिटी सलमान ताज ने बताया कि खोड़ा पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर छापेमारी कर ग्रीन इंडिया पैलेस में बृहस्पतिवार रात फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा।

यहां काम करने वाली युवक-युवतियां लोगों को कॉल कर खुद को इंश्योरेंस कंपनियों की रेग्यूलेटरी बताते थे। इसके बाद लोगों को लोन देने का लालच देते थे। लोन के बदले प्रोसेसिंग फीस के नाम पर मोटी रकम चेक के जरिए वसूल कर मोबाइल नंबर बदल देते थे। पकड़े जाने से बचने के लिए हर दो माह में कॉल सेंटर की जगह बदल देते थे।
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संचालकों ने कई आईडी और दस्तावेज बनवा रखे थे। एक ही व्यक्ति के कई नामों से अलग बैंकों में अकांउट थे। हर अकाउंट से 8-10 लाख की ठगी होने के बाद उस अकाउंट को बंद करवा दिया जाता था।एसपी सिटी ने बताया कि कॉल सेंटर संचालक दीन मोहम्मद उर्फ दीन अहमद उर्फ दीपक गुप्ता निवासी मिंटो रोड दिल्ली को दबोच लिया गया है।

इसके पास तीन पैन कार्ड, तीन लाइसेंस और तीन वोटर कार्ड बरामद हुए हैं। उसका साथी मतीन भागने में कामयाब हो गया। दोनों ही कॉल सेंटर गैंग के सरगना हैं। यहां काम करने वाले अतुल मिश्रा निवासी खोड़ा, सुरेंद्र कुमार निवासी वसुंधरा, निशा पांडेय निवासी न्याय खंड, मिली चौधरी निवासी नंदग्राम और कंचन निवासी नंदग्राम को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।            

नकली नोट गिरोह से जुड़ा है मतीन            
पुलिस के अनुसार फरार आरोपी मतीन नकली नोट के गिरोह से भी जुड़ा है। दीन मोहम्मद तीन साल पहले एक कॉल सेंटर में काम कर चुका है। दीन ने वहीं से कॉल सेंटर खोलने की योजना बनाई। जल्दी रुपये कमाने की चाहत में उसने नकली नोट गिरोह से जुड़े मतीन से संपर्क किया। दीन मोहम्मद 12वीं पास युवक-युवतियों को कॉल सेंटर की ट्रेनिंग देता।

युवतियों से कॉल करवाकर लोगों को रिझाया जाता और लोन लेने के इच्छुक लोगों के नंबर दीन मोहम्मद ले लेता। प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लोगों से ठगी की जाती। पुलिस के अनुसार अभी तक तीन-चार अकाउंट के जरिए 50-60 लाख की ठगी की जा चुकी है।            

- युवतियां देती थीं लोगों को वीआईपी कोड            
युवतियों से बात करने के बाद अगर कोई लोन लेने में रुचि दिखाता था, तो उसके नंबर के सामने वीआईपी, मोस्ट इंपारटेंट या ओके कोड दिया जाता था। वीआईपी कोड वाले लोगों से मोटी प्रोसेसिंग फीस वसूली जाती थी, जबकि मोस्ट इंपॉरटेंट और ओके से कुछ कम फीस ली जाती थी।

पकड़े गए युवक-युवतियों ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि संचालक ठगी का धंधा चलाते हैं। उन्हें लगता था कि सभी को लोन दिलवाया जाता है। पकड़ी गई महिलाओं में से एक का छह माह का बच्चा है। पुलिस ने कई कैंसल चेक, मोबाइल नंबरों का डाटा, बैंक अकाउंट की डीटेल और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।      
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