डस्टबिन खरीद में कथित घोटाले पर अब नगर निगम अधिकारी बचाव की मुद्रा में हैं। नगर आयुक्त ने मंगलवार को निगम का पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें आईएएस की ट्रेनिंग के दौरान ही मामले की जानकारी मिल गई थी।
इसी के चलते 24 मार्च को ही उन्होंने गोपनीय जांच के लिए अफसरों की कमेटी गठित कर दी थी। इस मामले को सार्वजनिक इसलिए नहीं किया गया कि संबंधित फर्म डस्टबिन की सप्लाई न रोक दे।
नगर आयुक्त अब्दुल समद ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद संबंधित फर्म को 1.99 करोड़ का वर्क आर्डर जारी किया गया था। बाद में संज्ञान में आया कि टेंडर में रेट ज्यादा है तो उन्होंने जांच के आदेश दे दिए थे।
जांच कमेटी में अकाउंट ऑफिसर, जलकल अभियंता व निर्माण विभाग के अधिकारियों को रखा गया था। स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी को जांच कमेटी में नहीं रखा गया। उनका कहना है कि जिस तरह मेरठ में 9500 रुपये का टेंडर रेट मिलने के बावजूद 5600 रुपये के हिसाब से कटौती कर भुगतान किया गया है, इसी तरह गाजियाबाद में भी पूरी रकम का भुगतान नहीं किया जाएगा।
जांच कमेटी की रिपोर्ट जल्द ही मिल जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक कटौती की जाएगी। नगर आयुक्त ने बताया कि फर्म की ओर से 100 फीसदी सप्लाई मिल चुकी है, जबकि भुगतान करीब 25 फीसदी 53 लाख रुपये का किया गया है। ऐसे में अभी निगम को कोई घाटा नहीं हुआ है।