डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, मगर कुछ लोग अब इसे ‘कमाई का धंधा’ बनाने लगे हैं। मरीज को इलाज के नाम पर ऐसा ट्रीटमेंट दे दिया जाता है, जिसकी उसे जरूरत ही न हो। शहर के एक निजी अस्पताल का ऐसा ही मामला सामने आया है।
पेट दर्द से पीड़ित एक महिला को जांच और इलाज के नाम पर चार दिनों तक आईसीयू में रखा गया और 32 हजार रुपये परिजनों से ऐंठ लिए। बाद में महिला को दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया गया। वहां पता चला कि महिला को पित्त की थैली में पथरी की शिकायत है।
पीड़ित की शिकायत पर सीएमओ ने जांच की तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। सीएमओ ने आदेश दिया है कि अस्पताल प्रबंधन तत्काल ही मरीज को 32 हजार रुपये वापस करे।
कविनगर थाना क्षेत्र के महिंद्रा एंक्लेव शास्त्रीनगर में रहने वाले प्रमोद गोयल की पत्नी नीति गोयल को पेट दर्द की शिकायत पर शास्त्रीनगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था।
प्रमोद के अनुसार इलाज के नाम पर उसकी पत्नी नीति गोयल को चार दिनों तक आईसीयू में रखा गया। इसकी एवज में 32 हजार रुपये भी ऐंठ लिए। इसके बाद भी पत्नी को आराम नहीं मिला तो डॉक्टरों ने उसे अन्य निजी अस्पताल रेफर कर दिया।
दूसरे अस्पताल में जांच हुई तो पता चला कि उसकी पत्नी के पित्त की थैली में 23 एमएम की पथरी है और जल्द ऑपरेशन नहीं किया गया तो जान को खतरा हो सकता है। अस्पताल में पत्नी के सफल ऑपरेशन के बाद एक दिन में ही डिस्चार्ज भी मिल गया।
प्रमोद ने इस मामले की शिकायत तहसील दिवस में सीएमओ से की तो सीएमओ ने जांच बैठा दी। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि अनावश्यक ही नीति को आईसीयू में रखा गया, जबकि उसकी कोई जरूरत नहीं थी।
इसके अलावा अस्पताल की रेट लिस्ट और इलाज के बिल में भी भिन्नता पाई गई है। सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल ने अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया है कि अनावश्यक रूप से आईसीयू में मरीज को रखने का चार्ज वापस किया जाए।
‘अस्पताल प्रबंधन को मरीज के पैसे वापस करने के आदेश दिए गए हैं और आदेश न मानने की स्थिति में अस्पताल का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।’ - डॉ. अजेय अग्रवाल, सीएमओ
कान के ऑपरेशन का मामला
संयुक्त जिला अस्पताल में पैसे लेकर भी कान का आपरेशन न करने की शिकायत का मामला भी सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल तक पहुंच गया। सीएमओ की जांच में पीड़ित महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपी सही पाए गए हैं।
सीएमओ ने आश्वासन दिया है कि डॉक्टर से जल्द ही उसे पैसे वापस दिलवाए जाएंगे। गौरतलब है कि घूकना निवासी सुनीता ने संयुक्त जिला अस्पताल के चिकित्सक पर आरोप लगाया था कि चिकित्सक ने उनकी बहु के कान के आपरेशन के लिए 6500 रुपये लिए लेकिन पर्दे में छेद का ऑपरेशन करने के बजाए सिर्फ चीरा लगाकर छोड़ दिया था।