शहर की कुछ हाईराइज सोसायटीज में चंद रुपयों के लालच में न केवल देश की सुरक्षा को कमजोर किया जा रहा है, बल्कि प्रतिमाह राजस्व को भी लाखों का चूना लगाया जा रहा है। चंद लोग नामचीन टेलीकॉम कंपनियों से एक वाईफाई कनेक्शन लेकर उसे आगे विभिन्न नामों ने कई-कई ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं। एक मिनी एक्सचेंज के रूप में इस गोरखधंधे को अंजाम दिया जा रहा है।
फर्जी डिस्ट्रीब्यूटर की यह दुकान क्रॉसिंग्स रिपब्लिक और राजनगर एक्सटेंशन जैसी हाईराइज सोसायटीज में संचालित की जा रही है। सरकार द्वारा सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए कोई नीति व मानक निर्धारित न किए जाने के कारण इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आईएसपी) इसका खुलकर दुरुपयोग कर रहे हैं।
सीमित सेवाओं के लिए अधिकृत होने के बावजूद ये इंटरनेट, टेलीफोन, टोल फ्री, लीज लाइन व इंटरनेट लीज लाइन जैसी सभी सेवाएं देकर बीएसएनएल के बाजार को चौपट कर रहे हैं। ये सर्विस प्रोवाइडर बीएसएनएल के साथ ही टाटा, रिलायंस, एयरटेल से डाटा प्लान खरीदता है जिसका मल्टीयूजर के रूप में दुरुपयोग करते हैं।
ये डिस्ट्रीब्यूटर बिना किसी छान-बीन के लोगों को प्लान उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में कोई भी असामाजिक तत्व और आतंकी तक इस प्लान के जरिए सोसायटी की मुख्य जानकारी जुटा कर किसी भी हादसे को अंजाम दे सकते हैं।
कैसे कर रहे फर्जीवाड़ा
किसी नामी कंपनी से डाटा खरीदने के बाद इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आईएसपी) सोसायटी में नए नाम से अपना सैटअप तैयार करते हैं। जो डाटा एक व्यक्ति के लिए था, उसी डाटा प्लान का कनेक्शन वे कई लोगों को दे देते हैं।
सर्विस टैक्स न लगने की वजह से यह प्लान टेलीकॉम की अन्य कंपनियों के मुकाबले उपभोक्ताओं को सस्ता पड़ता है। जबकि यह डाटा प्लान सुरक्षा की दृष्टि सी बेहद खतरनाक है।