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जिंदगी की जंग हार गई गुलिस्ता

Sun, 07 May 2017 10:21 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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गुलिस्ता - फोटो : अमर उजाला
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 कैला भट्टा में 20 मार्च की रात को सिरफिरे आशिक द्वारा तेजाब डालने से घायल हुई गुलिस्ता 48 दिनों बाद जिंदगी से जंग हार गई और उसकी रविवार सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। शाम को कैला भट्टा स्थित कब्रिस्तान में गुलिस्ता को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
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परिजनों की माने तो गुलिस्ता ने अंतिम सांसे लेते समय भी अपने ऊपर तेजाब डालने वाले दोनों आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की ख्वाहिश जताई है।गुलिस्ता के भाई जाहिद ने बताया कि गुलिस्ता 48 दिनों से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थी। इस बीच केवल एक बार ही उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया था।

कुछ दिन बाद ही हालात बिगड़ने पर फिर उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि हर रोज जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही गुलिस्तां ने रविवार सुबह परिजनों से बातचीत की उसने अपने आखिरी सांस लेते हुए फरार दोनों आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की बात कही।
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जाहिद का आरोप है कि कोतवाली पुलिस ने केवल एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। वहीं दो आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। दो अन्य आरोपियों के बारे में पुलिस से जब सवाल भी किया जाता है तो वह टालमटोल कर देते हैं।

नगर कोतवाली प्रभारी लक्ष्मी चौहान का कहना है कि पुलिस दोनों आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। मामले की जांच की जा रही है। साथ ही अब गुलिस्ता की मौत होने के बाद आरोपियों के खिलाफ धाराओं में हत्या की धारा भी जोड़ दी जाएगी।

बता दें कि 20 मार्च की रात को कैला भट्टा में रहने वाली गुलिस्ता के ऊपर सोते समय शाहरुख नाम के युवक ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर उस तेजाब डाल दिया था, जिससे वह करीब 90 प्रतिशत तक झुलस गई थी। इस मामले में पुलिस ने पांच अप्रैल को आरोपी शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसके दो साथी फरार हैं।

वारदात के बाद भागते समय तीनों आरोपी दूधेश्वरनाथ मंदिर के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे।

प्रधानमंत्री की ओर से मिलने वाली मदद नहीं मिली
गुलिस्ता के भाई जाहिद ने बताया कि उनके परिवार को अब तक प्रधानमंत्री की ओर से तेजाब पीड़िताओं को मिलने वाली एक लाख रुपये की मदद राशि नहीं मिली है। उन्हें केवल प्रशासन की तरफ  से लक्ष्मीबाई योजना के तहत पांच लाख रुपये मिले थे, जोकि गुलिस्ता के इलाज में लग गए।
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पीड़ित परिवार को इस बात का भी मलाल है कि 48 दिनों में एक भी अफसर और मंत्री उनकी बेटी से मिलने नहीं आया। आखिरी सांस तक साथ रहा होने वाला पति
गुलिस्ता की अंतिम सांस तक उसका होने वाला पति बुलंदशहर खुर्जा निवासी दानिश उसके साथ था।

दोनों की सगाई भी हो चुकी थी और जल्द ही उनका निकाह होने वाला था।
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