गाजियाबाद। निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने कोर्ट में अर्जी देकर अपने केस से अपने अधिवक्ता का वकालतनामा खारिज करने की गुहार लगाई है। डासना जेल प्रशासन के माध्यम से भेजी गई इस अर्जी में कोली ने कहा है कि उसका अधिवक्ता जानबूझकर उसे एक ऐसे अपराध का अपराधी बना रहा है, जो उसने किया ही नहीं।
कोली ने अब खुद ही अपने केस की पैरवी करने की गुहार कोर्ट से लगाई है। सीबीआई विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने कोली की अर्जी को मंजूर कर लिया है। सीबीआई के स्पेशल लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि डासना जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद सुरेंद्र कोली की अर्जी को सोमवार सुबह जेल प्रशासन द्वारा कोर्ट में पेश किया गया।
अर्जी में कोली ने लिखा है कि एक एनजीओ के अधिवक्ता को उसके द्वारा अपना केस लड़ने की अनुमति दी गई थी। अब 329 के तहत उसका अधिवक्ता कोर्ट के समक्ष एक ऐसे अपराध की बात कर रहा है, जो उसने किया ही नहीं है।
अधिवक्ता ने उसे मानसिक रूप से बीमार बताते हुए कहा है कि मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण उससे अपराध हुए, जबकि उसने कोई अपराध नहीं किया है।
कोली ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि वह गरीब है और पैसे देकर वकील नियुक्त नहीं कर सकता। उसने पहले भी अपने मामलों में पैरवी की है। ऐसे में उसे केस की खुद पैरवी किए जाने की इजाजत दी जाए। विशेष न्यायाधीश ने कोली की अर्जी को मंजूर कर लिया है।
कोर्ट में पेश हुए कोली-पंधेर, फाइनल बहस शुरू
गाजियाबाद। निठारी कांड के एक मामले में सोमवार से फाइनल बहस शुरू हो गई। इससे पूर्व डासना जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद सुरेंद्र कोली को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया। जमानत पर चल रहा दूसरा आरोपी मोनिंदर सिंह पंधेर भी कोर्ट पहुंचा। पंधेर के अधिवक्ता ने बहस की जबकि सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बहस की। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए अब 25 अप्रैल की तारीख नियत की है।