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डूडा हेडा गांव में रिहायशी कालोनी का भूमि अधिग्रहण रद्द

Wed, 14 Dec 2016 09:27 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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हाईकोर्ट - फोटो : file photo
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हाईकोर्ट ने अंसल समूह और उसकी सहयोगी कंपनियों को रिहायशी कालोनी विकसित करने के लिए आवंटित भूमि का अधिग्रहण रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों द्वारा शासनादेशों की अनदेखी कर किए गए अधिग्रहण को अवैध करार दिया है।
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कहा कि प्राइवेट डेवलपर को जमीन उपलब्ध कराने में अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की तथा अपने अधिकार का दुरुपयोग किया है।सरकार ने गाजियाबाद के डूडा हेडा गांव में आवासीय कालोनी बनाने के लिए भूमि का अधिग्रहण किया था। इसे विकसित करने के लिए अंसल और कई दूसरी कंपनियों के समूह को दे दिया गया।

अधिग्रहण को डूडा हेडा की देवकी और कई अन्य भू स्वामियों ने चुनौती दी थी। याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा की पीठ ने सुनवाई की।याचिका के अनुसार प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्र में रिहायशी कालोनी बनाने के लिए प्राइवेट कंपनियों को लाइसेंस देने की योजना तैयार की। भूमि किसानों की सहमति से अधिग्रहीत की जानी थी।
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लाइसेंस निविदा के माध्यम से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में पंजीकृत कंपनियों को दिया जाना था। नियमानुसार वही कंपनी लाइसेंस पाने की हकदार थी जिसके पास खुद की भी जमीन हो।अंसल ने आठ दूसरी कंपनियों की भूमि को अपनी जमीन बताते हुए लाइसेंस के लिए अर्जी दी।

जीडीए ने एक कमेटी बनाकर अंसल का लाइसेंस रद्द किया और उसके सहित आठ कंपनियों के समूह को लाइसेंस दे दिया गया। कोर्ट ने इसे नियमों के विपरीत करार देते हुए कहा कि आठ कंपनियों का समूह जीडीए में पंजीकृत नहीं था इसलिए उसे लाइसेंस नहीं दिया जा सकता।

कंपनियों ने अधिग्रहीत भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा खरीदकर 2005 में ही निर्माण शुरू कर दिया। जबकि, भूमि का अधिग्रहण 2008 में किया गया। इस समय तक तो अंसल के पंजीकरण की अवधि भी समाप्त हो गई थी।प्रदेश सरकार ने दलील दी कि भूमि का अधिग्रहण जीडीए के लिए किया गया।

प्राइवेट कंपनियों को लाइसेंस जीडीए ने दिया है, इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। खंडपीठ ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि अधिग्रहण प्राइवेट कंपनियों के लिए ही किया गया जिसमें नियमों की अनदेखी की गई।

कंपनियों द्वारा निर्माण पर 60 लाख रुपये हुए व्यय की दलील पर कोर्ट का कहना था कि कंपनियों ने सब कुछ जानते हुए भी अपने जोखिम पर रकम खर्च की है इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार है।
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