नकली सिक्कों को असली सोने का बताकर लोगों को ठगने वाले एक गिरोह का कोतवाली पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए उसके दो सदस्यों को दबोच लिया। उनके पास से 2380 नकली सोने के सिक्के बरामद हुए हैं। पकड़े गए आरोपी रिश्ते में देवर-भाभी हैं। पुलिस ने शुक्रवार को उन्हें एसीजेएम कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पौड़ी जेल भेज दिया गया।
शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में अपर पुलिस अधीक्षक सरिता डोबाल ने बताया कि बृहस्पतिवार को लकड़ीपड़ाव निवासी मुक्तियार पुत्र जानी ने एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी थी कि बुधवार शाम एक व्यक्ति उसके पास आया और सोने के दो सिक्के सस्ते दामों में बेचने लगा। उसने बताया कि उन्हें ये सिक्के खुदाई में मिले थे।
उनकी बातों पर भरोसा करते हुए उसने दो सिक्के खरीद लिए। उसने जब सिक्कों को ज्वैलर्स को दिखाया, तो ये नकली पाए गए। इसके बाद बृहस्पतिवार शाम करीब पांच बजे एक टीम कौड़िया चेक पोस्ट पर चेकिंग कर रही थी, तभी उन्हें आरटीओ चेक पोस्ट की ओर से एक संदिग्ध व्यक्ति पैदल आता हुआ दिखा।
वह पुलिस को देखते ही वह दिल्ली फार्म की ओर भागने लगा, जिसे कुछ दूरी पर ही दबोच लिया गया। तलाशी में उसके पास से करीब 1300 नकली सोने के सिक्के बरामद हुए।पूछताछ में आरोपी की पहचान गाजियाबाद के सुदामा पुरी निवासी सीताराम पुत्र ओंकार के रूप में हुई। उसने बताया कि वह कोटद्वार में नकली सिक्के बेचने आया है।
इसमें उसके साथ उसकी रिश्ते की भाभी भी शामिल है, जो अभी बिजनौर गई हुई है। इस पर पुलिस नेे आरोपी महिला को भी 1080 नकली सिक्कों के साथ बिजनौर बस अड्डे से गिरफ्तार कर लिया। महिला की पहचान गाजियाबाद निवासी मीरा देवी पत्नी देवा के रूप में हुई।
पुलिस क्षेत्राधिकारी जेआर जोशी ने बताया कि दोनों ठग अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े हैं। पर्दाफाश करने वाली टीम में कोतवाल उत्तम सिंह जिमिवाल, उपनिरीक्षक सतेंद्र भाटी, उर्मिला बिष्ट, अमित राणा, मुकेश कुमार, विनीत कुमार व अरुण कुमार शामिल थे।