असालतपुर-फर्रुखनगर में शुक्रवार को पटाखा फैक्ट्री-गोदाम में धमाके से पांच लोगों की मौत के बाद प्रशासन की नींद टूटी। शनिवार को आला अफसरों की टीम ने 67 पटाखा फैक्ट्री-गोदामों को सील कर दिया। इस दौरान कुछ पटाखा कारोबारियों ने इस कार्रवाई का विरोध किया।
अधिकारियों के साथ नोकझोंक तक हुई। पर अधिकारियों द्वारा एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी पर कारोबारी शांत हो गए। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे टीम ने पहुंचते ही पटाखा फैक्ट्री और गोदामों को सील करना शुरू कर दिया।
नायब तहसीलदार नीरज कुमार द्विवेदी ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखा कारोबार पर प्रतिबंध है। शुक्रवार को हुए हादसे को देखते हुए सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। फर्रुखनगर में सभी फैक्ट्रियों को सील किया जाएगा।
इस बीच कारोबारियों ने कार्रवाई का विरोध किया, पर पुलिस बल के आगे किसी की नहीं चली। नायब तहसीलदार ने बताया कि 67 फैक्ट्री-गोदाम सील किए गए हैं। सीलिंग की यह कार्रवाई रविवार को भी जारी रहेगी।
दो कुत्तों को भी गोदाम में किया बंद
पटाखा फैक्ट्री मालिकों के पहुंचने से पहले प्रशासन ने सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी थी। इस दौरान एक गोदाम सील कर दिया गया, जिसमें दो जर्मन शैफर्ड कुत्ते भी बंद हो गए। गोदाम मालिक के अनुरोध पर अधिकारियों ने सील खोली और कुत्तों को बाहर निकाला।
क्षतिग्रस्त गोदाम से हटाए गए पटाखे
शुक्रवार को जिस पटाखा फैक्ट्री-गोदाम में धमाका हुआ था। उसके गोदाम के एक हिस्से में रखे पटाखों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। गोदाम के एक हिस्से को पहले ही प्रशासन की टीम ने ढहा दिया था।
नमाज अदा करने के लिए आई कॉल ने बचाई शहजाद की जान
साहिबाबाद। फर्रुखनगर में पटाखा फैक्ट्री में धमाके से पहले नमाज अदा करने के लिए आई कॉल सेे शहजाद की जान बच गई। फैक्ट्री के अंदर नेटवर्क नहीं आने से शहजाद फोन पर बात करता हुआ बाहर आ गया। इसी दौरान फैक्ट्री में धमाका हो गया।
फर्रुखनगर निवासी शहजाद भी शुक्रवार को फैक्ट्री मालिक पप्पू, सगीर, रफीक, अशफाक व कुतुबुद्दीन के साथ काम करने के लिए गया था। मृतक अशफाक के रिश्तेदार अब्दुल वहाब ने बताया कि शुक्रवार को मस्जिद में नमाज अता करने जाना था।
पौने एक बजे अशफाक के भतीजे आरिफ ने मस्जिद जाने के लिए शहजाद के पास फोन किया। इस दौरान फैक्ट्री में शहजाद के मोबाइल पर नेटवर्क कम होने से आवाज साफ नहीं आ रही थी। शहजाद बात करने के लिए फैक्ट्री से बाहर सड़क पर आ गया। इसी दौरान जोरदार धमाका हो गया।
एक साथ उठे तीन जनाजे, सभी हुए गमगीन
साहिबाबाद। फर्रुखनगर में शुक्रवार को पटाखा फैक्ट्री में धमको की साथ लगी आग में झुलसकर पांच लोगों की मौत से गांव में मातम पसर गया। धमाके में एक ही परिवार की तीन सदस्यों की मौत से गांव के घरों में शुक्रवार रात को चूल्हा तक नहीं जला।
अल सुबह एक साथ गांव से पांचों मृतकों के जनाजे उठे। इससे पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। रिश्तेदार अब्दुल वहाब ने बताया कि रफीक, सगीर और अशफाक एक ही परिवार के थे। सभी मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते थे। शुक्रवार सुबह यह सभी पप्पू ठेकेदार के गोदाम की सफाई करने गए थे।
इसे दौरान वहां धमाका हो गया। धमाके की आवाज सुनकर गांव के ज्यादातर लोग मौके पर पहुंचे। वहां का खौफनाक मंजर देखकर सभी को दहला दिया। उन्होंने बताया कि रफीक, सगीर और अशफाक एक ही परिवार से थे और रिश्ते में चचेरे भाई थे। एक परिवार सेे तीन जनाजे उठाने से गांव के लोग काफी दुखी हैं।
उन्होंने बताया कि रफीक के सात, सगीर के आठ और अशफाक की एक बच्चे है, जबकि कुतुबुद्दीन के चार और पप्पू के तीन बच्चे हैं। इनके परिवार का पालन पोषण करने वाला अब कोई नहीं है। उन्होंने बताया कि एक ही गांव में पांच मौतें होने से गांव के घरों में शुक्रवार रात को चूल्हे नहीं जले।
परिवारों को प्रशासन और शासन से मदद की उम्मीद है। मृतक के परिजनों का कहना है कि अब उन्हें मुआवजे से ही राहत की आस दिख रही है। मुआवजे से वे एक छोटा कारोबार शुरू कर पालन-पोषण करेंगे। इसके साथ ही बेटियों की शादी भी हो जाएगी।
प्रशासन ने एक महीने का राशन उपलब्ध कराया
पटाखा गोदाम में धमाके में मारे गए पांचों लोगों के परिवार का शनिवार को खाद्य आपूर्ति विभाग के कर्मचारी राशन कार्ड बनाने के लिए पहुंचे। सभी परिवारों का राशनकार्ड बनाया गया। उन्हें एक महीने का राशन भी मुफ्त में दिया गया।
अब्दुल वहाब ने बताया कि पीड़ित परिवार को राशन की दुकान से एक महीने का मुफ्त राशन शुक्रवार का दिलवाया गया। शुक्रवार शाम को परिवार से मिलने पहुंचे प्रदेश के खाद्य एवं रसद मंत्री अतुल गर्ग ने इसकी घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि गांव वालों की मांग है कि सभी परिवार के लोगों को मुआवजा दिया जाए।
फैक्ट्रियां बंद होने से गांव के 80 फीसदी लोग हुए बेरोजगार
साहिबाबाद। दिल्ली- एनसीआर में नवंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई पटाखा फैक्ट्रियों पर रोक से फर्रुखनगर गांव के ज्यादातर लोग बेरोजगार हो गए। गांव के लोगों को अपना घर चलाना तक मुश्किल हो गया है।
शनिवार को फर्रुखनगर में गांव के लोगों ने अपना दर्द बयां किया। लोगों का कहना था कि दिल्ली-एनसीआर में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर पटाखा बनाने वाली फैक्ट्रियों पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से यहां पटाखा बनाने का काम बंद कर दिया गया।
इससे पटाखा कंपनी में मजदूरी करने वाले गांव के 80 प्रतिशत लोग बेरोजगार हो गए। लोगों का कहना था कि गांव में शिजक्षा का अभाव है। इसे यहां लोग कम पढ़े लिखे हैं। इसलिए वह केवल मजदूरी पर ही आश्रित हैं।
वह या तो किसी के खेत में काम करते हैं या गांव में ही ईंट के भट्ठों पर काम कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। गांव वालों के पास मजदूरी ही एक सहारा बचा है। जिसके जरिए वह अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।