फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

188 परिवारों के लख्ते जिगर, सालों से नहीं लौटे घर

Tue, 21 Feb 2017 10:50 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
विज्ञापन
गायब बच्चे - फोटो : demo pic
विज्ञापन

विज्ञापन
जिला बच्चों के लिए महफूज नहीं है, यह हम नहीं बल्कि खुद पुलिस के आंकड़े भी बता रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में गाजियाबाद से 1404 बच्चे गायब हुए हैं। इनमें से अधिकांश मिल गए हैं, लेकिन शहर के 188 परिवारों के लख्ते जिगर अभी भी घर नहीं लौटे हैं। उनके इंतजार में मां-बाप की आंखें पथरा गई हैं।

पुलिस रिकार्ड में तो बच्चे सिर्फ गुम हुए दर्शाए गए हैं, लेकिन कई परिवार ऐसे हैं जिनका मानना है कि  उनके लाड़लों का अपहरण हुआ है। किसी परिवार का इकलौता सहारा छिना तो किसी के आंगन की किलकारियां खो गईं। गाजियाबाद से सबसे ज्यादा बच्चे वर्ष 2011 और 2012 में गुम हुए हैं। इन दोनों साल में 433 बच्चे गायब हुए हैं।
विज्ञापन


इनके अलावा भी बच्चों की गुमशुदगी के कई ऐसे मामले हैं, जो रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाने में दर्ज हैं। ट्रेनों में सफर करते-करते यात्रियों के बच्चे गुम हो गए और फिर लौटकर नहीं आए। हालांकि इस दौरान गाजियाबाद पुलिस के खास अभियान ‘ऑपरेशन स्माइल’ के दौरान एक हजार से ज्यादा बच्चे बरामद किए गए।

इनमें दूसरे राज्यों से भी बच्चे बरामद किए गए थे। इस संबंध में एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि पुलिस गुमशुदा बच्चों की तलाश में लगातार अभियान चलाती रहती है। आगे भी अभियान चलाकर बच्चों को बरामद किया जाएगा।

ह्यूमन ट्रैफिकिंग की भी आशंका
गाजियाबाद से इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के गुम होने के पीछे ह्यूमन ट्रैफिकिंग की भी आशंका जताई जा रही है। आशंका है कि बच्चों के गुम होने के पीछे किसी बड़े गैंग का हाथ भी हो सकता है। पूर्व में बच्चे चोरी करने के कई मामले भी सामने आ चुके हैं। एमएमजी अस्पताल में बच्चा चोरी के आरोप में एक महिला रंगे हाथ पकड़ी गई थी।
विज्ञापन


वहीं, रेलवे स्टेशन पर एक बच्चे को साधू के वेश में एक व्यक्ति ले गया था। रात को ट्रेन का इंतजार करती अकेली महिला का भी बच्चा चोरी हो गया था। यह दोनों मामले रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गए थे।

डराता है गुमशुदा बच्चों का आंकड़ा
वर्ष         गुम हुए बच्चे    वापस लौटे     इनका है इंतजार
2007        147            144                 03    
2008        178            171                 07

2009        118            111                 07
2010        144            136                 08

2011        203            181                 22
2012        230            224                 06

2013        149            124                 25
2014         47                34                  13

2015         98                57                  41
2016         90                34                  56

कुल         1404            1216               188
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें