भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया पर एके-47 से हुए जानलेवा हमले का पुलिस ने बुधवार को आधिकारिक खुलासा कर दिया। 17 साल पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए सुरेश दीवान के बेटे मनीष और भतीजे मनोज ने यह साजिश रची थी। वारदात में शामिल चार हमलावरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है जबकि साजिशकर्ता मनीष और मनोज समेत आठ आरोपी अभी भी फरार हैं।
पकड़े गए आरोपी निशांत उर्फ जीतू भदौरिया निवासी प्रताप नगर (कविनगर), राहुल त्यागी निवासी ग्राम दोज्जा थाना बिनौली बागपत, रामकुमार उर्फ राम सिंह निवासी महरौली और जितेंद्र उर्फ पोपे निवासी सदरपुर हैं।
गाजियाबाद पुलिस ने एसटीएफ के साथ मिलकर इन्हें मंगलवार रात करीब साढ़े 11 बजे दुहाई पाइप लाइन तिराहे से गिरफ्तार किया। इनसे वारदात में इस्तेमाल दो मोबाइल और स्कूटी बरामद की गई हैं।
मनोज और मनीष के अलावा गौरव निवासी राजपुर, ग्रेटर नोएडा, अभिषेक निवासी लोनी, बबल उर्फ योगेंद्र निवासी राजनगर एक्सटेंशन, बिट्टू, संसार सिंह और पहलवान भागे हुए हैं।
आईजी (मेरठ जोन) सुजीत पांडे और आईजी (एसटीएफ) रामकुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि 12 जून 1999 को महरौली के कांस्टेबल सुरेश दीवान की प्रॉपर्टी विवाद में दिल्ली के शकरपुर इलाके में हत्या कर दी गई थी।
इस मामले में ब्रजपाल तेवतिया समेत कई लोगों को नामजद किया गया था, लेकिन विवेचना में भूमिका न पाए जाने पर ब्रजपाल तेवतिया का नाम निकाल दिया गया था। दीवान के बेटे मनीष, विक्की और भतीजे मनोज के मन में तभी से ब्रजपाल से रंजिश पनप रही थी।
बदला लेने की सोच के साथ वे बड़े हुए और अब हत्या की साजिश रची। मनीष की उम्र इस समय 26 साल है। उसने शूटरों को मोटी रकम देने का वादा कर एके-47, कारबाइन और पिस्टल जैसे स्वचालित हथियारों का इंतजाम किया।
इसके बाद मनीष ने अपने छह साथियों के साथ 11 अगस्त को ब्रजपाल तेवतिया पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले के बाद सभी आरोपी मौके से अलग-अलग ग्रुप में फरार हो गए। स्कूटी सवार राम सिंह ने ही तेवतिया के बारे में पल-पल की जानकारी मोबाइल पर मनीष को दी थी। इसके बाद ही वारदात को अंजाम दिया गया।
मनीष ने खुद बरसाईं थीं एके-47 से गोलियां
एके 47 चलाते हुए अगर मनीष का हाथ नहीं बहका होता तो तेवतिया समेत 8 सात लोगों की जान जा सकती थी। दरअसल, मनीष चाहता था कि पिता की हत्या का बदला वह खुद तेवतिया को गोली मार कर ले।
उसने खुद एके 47 चलाने का फैसला लिया, इसे लेकर वारदात से दो दिन पहले मनोज से उसका झगड़ा भी हुआ था। मनोज ने उससे कहा था कि वह एके 47 चलाना नहीं जानता, लिहाजा निशाना चूक सकता है, मगर वह नहीं माना।
यह जानकारी देते हुए एसपी रूरल राकेश पांडे ने बताया कि जब मनीष ने एके 47 से 28 गोलियों का बर्स्ट मारा तो उसका हाथ बहक गया और निशाना सटीक नहीं लगा। ज्यादा गोलियां बोनट और शीशे में लगती हुई निकलीं।
वारदात के लिए 35 लाख में बेची थी जमीन
पुलिस ने बताया कि मनीष के सीने में 17 साल से पिता की हत्या का बदला लेने के लिए खून धधक रहा था। उसने यह बात अपने दोस्त निशांत को बताई जो 12वीं तक उसके साथ पढ़ा है।
मनीष 12वीं के बाद नहीं पढ़ा, जबकि निशांत ने एलएलबी की है। उसके साथ देने के लिए हामी भरने पर चचेरे भाई मनोज से बात की गई। फिर तीनों ने साजिश को अमली जामा पहनाने की ठानी।
मनीष ने गांव की कुछ जमीन करीब 35 लाख रुपये में बेची। सारा पैसा उसने इसी वारदात में खर्च कर दिया। हालांकि यह निशांत को भी जानकारी नहीं है कि मनोज और मनीष ने हथियार, कार कैसे अरेंज किए और शूटरों से कितनी सुपारी तय की गई थी।
एक सप्ताह पहले रचा गया था षड्यंत्र
बकौल आईजी, वारदात से एक सप्ताह पहले मनीष के घर ब्रजपाल की हत्या का षड्यंत्र रचा गया, जिसमें गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों के अलावा और कई लोग शामिल थे। पहली मीटिंग छह अगस्त को रुड़की में हुई थी।
राम सिंह को रेकी करने भेजा था। 10 अगस्त को राम सिंह ने रेकी करते समय तेवतिया के निकलने की बात फोन से मनीष को बताई थी। मनीष फॉरर्च्यूनर कार से साथियों के साथ उनके पीछे गए, लेकिन मुरादनगर में तेवतिया की कार आगे निकल जाने के कारण वारदात नहीं कर सके।
इसके बाद 11 अगस्त को फिर राम सिंह ने रेकी की, जिसके आधार पर मनीष फॉरर्च्यूनर से साथियों के साथ तेवितया के काफिले के पीछे मुरादनगर तक गया। राम सिंह स्कूटी चला रहा था और ब्रजपाल की मूवमेंट की जानकारी मोबाइल पर हमलावरों को दे रहा था।
तेवतिया पहले मुरादनगर कस्बे में एक कार्यक्रम में गए, इसके बाद रावली रोड पर तेरहवीं में शामिल होने गए। उसी समय कार सवार बदमाश रावली रोड पर टेलीफोन एक्सचेंज केसामने घात लगाकर बैठ गए।
कार निशांत भदौरिया चला रहा था। निशांत ने कार को तेवतिया की कार के आगे अड़ा दिया और मनीष समेत बाकी हमलावरों ने एके 47, कारबाइन और पिस्टलों से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
घटना को अंजाम देकर वे मुरादनगर नहर के किनारे से अंदर जाकर कार अबूपुर गांव के निकट जंगल में छोड़कर चार-चार के ग्रुप में हथियारों कोबैग में डालकर खेतों से होते हुए मेरठ रोड पर आए।
यहां टेंपो में बैठकर एक परिचित के यहां शरण लेने मोदीनगर जा रहे थे। इसी दौरान मोदीनगर में पुलिस की चेकिंग देखकर ऑटो से उतरकर हथियारों से भरा बैग लेकर भागने लगे। पुलिसकर्मियों ने पीछा शुरू कर दिया, जिस कारण हथियारों का बैग छोड़कर अलग-अलग दिशाओं में भाग गए।
छठी बार में पूरी हो पाई हमले की साजिश
ब्रजपाल तेवतिया पर 11 अगस्त से पहले भी पांच बार हमले की कोशिश की गई थी, मगर हर बार किसी न किसी वजह से वारदात नहीं हो सकी थी। 8, 9, 10 अगस्त को भी हमले की साजिश थी, मगर एक बार हथियार लेने गई गाड़ी रह गई तो कई बार तेवतिया की कार आगे निकल गई।
मोबाइल रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज बनेगी अहम सुबूत
पुलिस को निशांत के मोबाइल में वारदात से तीन दिन पहले से वारदात के बाद तक की कॉल डिटेल मिले हैं, जिसमें किस तरह साजिश रची गई वह रिकार्ड है। इसे पुलिस पुख्ता सुबूत मान रही है।
रिकॉर्डिंग को एफएसएल जांच के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा मुरादनगर और मोदीनगर में मिली सीसीटीवी फुटेज, स्कूटी से पल-पल की रेकी करते राम कुमार की तस्वीरें भी ऐसे ही सुबूत हैं। आईजी ने बताया कि पुलिस के पास छह चश्मदीद भी हैं, जिन्होंने वारदात करते आरोपियों को देखा है। इसकेअलावा कार पर मिले फिंगर प्रिंट भी मिल रहे हैं।
एनएसए और गैंगस्टर की होगी कार्रवाई, कई प्रदेशों में दबिश
आईजी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ एनएसए और गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की जाएगी। वारदात के बाद पकड़े गए हमलावर मेरठ, ग्रेटर नोएडा और पिलखुवा में रुके थे।
असलहे बरामद करने वाले सिपाही होंगे पुरस्कृत
हमलावरों के असलहे बरामद करने वाले सिपाही तौकीर और अनवार को पुलिस पुरस्कृत करेगी। आईजी ने घोषणा की है कि दोनों बहादुर सिपाहियों ने जान की परवाह नहीं की, उन्हें 20-20 हजार रुपये दिए जाएंगे और डीजीपी की सराहनीय सेवा का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। बता दें कि इन्हीं सिपाहियों ने एके-47 आदि असलहे बरामद किए थे, जो हमलावर छोड़कर भाग गए थे।
20 टीमें, 150 पुलिसकर्मी लगे थे खुलासे में
आईजी ने बताया कि खुलासे में पुलिस और एसटीएफ की 20 टीमों में 150 पुलिसकर्मी लगे हुए थे। इन्होंने छह प्रदेशों समेत 22 जिलों में दबिश दी। उन्होंने बताया कि अभी भी राजस्थान समेत कई प्रदेशों में दबिश दी जा रही है।
खट्टा गैंग का है राहुल
पकड़े गए आरोपियों में राहुल त्यागी बागपत के कुख्यात रहे राहुल खट्टा गैंग का सदस्य है। जितेंद्र ने मनीष को शूटर अरेंज कराए थे। राम सिंह रेकी करने वाला है और निशांत शूटर है। हालांकि जितेंद्र का कहना था कि उसके फोन से मनीष ने बात की थी, वह वारदात में शामिल नहीं था।
स्कूटी से हमलावरों तक पहुंची पुलिस
राम सिंह जिस स्कूटी से रेकी कर रहा था, उसकी सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिली थी। एक जगह राम स्कूटी से हेलमेट उतारता है। वहीं से पुलिस को सुराग मिला। राम के हत्थे चढ़ते ही केस की कड़ियां जुड़ती चली गईं। पुलिस को इलेक्ट्रोनिक सर्विलांस से भी काफी मदद मिली।
खुलासा सही या गलत, अभी पता नहीं: विकास
ब्रजपाल तेवतिया के छोटे भाई विकास तेवतिया ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि पुलिस ने क्या खुलासा किया है और खुलासा सही है या गलत। उन्होंने बताया कि वह बड़े भाई के साथ अस्पताल में हैं। उनके स्वस्थ होने के बाद ही पता चल पाएगा कि पुलिस के खुलासे में कितनी सच्चाई है।
पुलिस चेकिंग पर सवाल
आईजी ने खुलासा किया कि पुलिस के पास 48 प्वाइंटों की सीसीटीवी फुटेज है, लेकिन ऐसे में सवाल यह है कि शहर में लूट की कार से शूटर एके 47 लेकर कई दिन से घूम रहे थे और पुलिस को इसकी भनक नहीं थी।
चेकिंग करने वाली पुलिस किन वाहनों को चेक कर रही थी, यह पुलिस ही जाने? इस बारे में पुलिस सूत्रों का कहना है कि अमूमन लग्जरी कारों को पुलिस चेक नहीं करती है।
तेवतिया की हालत में सुधार
नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया की हालत में बुधवार को थोड़ा सुधार आया है। डॉक्टरों ने एक-एक घंटे के अंतराल पर वेंटिलेटर हटाया। डॉक्टरों के मुताबिक रिकवरी शुरू होने पर अब उनके घाव भी भरने लगे हैं।
बुधवार को तेवतिया ने परिजनों से थोड़ी बात करने की भी कोशिश की। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें बोलने से अभी मना किया है। भाजपा के मीडिया प्रभारी नीरज गोयल ने बताया कि तेवतिया के साथ भर्ती गनर अशोक और रामपाल की हालत में भी सुधार है। अशोक की रीढ़ की हड्डी में दो गोलियां फंसी हुई हैं। जिन्हें फिलहाल नहीं निकाला जा सका है।
खुलासा तो हुआ मगर अभी सवाल बाकी हैं
पुलिस ने भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया पर हुए हमले का अधूरा खुलासा किया है। अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं, जिनके जवाब पुलिस अफसरों के पास नहीं हैं। पुलिस न तो मुख्य सूत्रधार मनीष और मनोज को पकड़ पाई है और न ही बाकी शूटरों को। पुलिस को यह भी जानकारी नहीं है कि वारदात में इस्तेमाल एके-47, कारबाइन और विदेशी पिस्टल किसने उपलब्ध कराए थे।
सुपारी की रकम कितनी तय हुई थी, वह दी गई है या नहीं। गुड़गांव से 8 जून को लूटी गई फॉरर्च्यूनर कार हमलावरों तक कैसे पहुंची। इस मामले में किसी बड़े क्रिमिनल गैंग की कितनी भूमिका है, यह भी साफ नहीं है।
अभी तक राकेश हसनपुरिया की पत्नी सुनीता और मनोज के दोस्त शेखर को पुलिस ने न तो क्लीन चिट दी है और न ही इस मामले में उसका रोल बताया है। पुलिस के प्रेस नोट में मनीष के भाई विक्की का भी जिक्र है, हालांकि हमलावरों या साजिशकर्ताओं में वह शामिल है या नहीं, यह खुलकर नहीं लिखा गया है।
फरार आरोपियों को शेल्टर किसने दिया है। वह कहां छिपे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि मनीष और मनोज की गिरफ्तारी के बाद ही इस केस से पूरी तरह से पर्दा उठ पाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में आईजी मेरठ जोन ने भी स्वीकार किया कि इस मामले में अभी काफी कुछ है, जो बाकी है। बता दें कि इस मामले में तेवतिया समेत सात लोग गोली लगने से घायल हो गए थे।
लूटी हो सकती है एके-47, इटली मेड थी पिस्टल
तेवतिया पर जिस एके-47 से हमला किया गया, वह लूटी हुई हो सकती है। पुलिस देशभर में मैन्युअली, इंटरनेट और एनसीआरबी के जरिए मालूम कर रही है कि कहां-कहां से कब एके-47 लूटी गई हैं।
आईजी ने बताया कि राजस्थान से पिछले दिनों एक एके-47 लूटी गई थी। हो सकता है कि आरोपियों ने इसे किराए पर लिया हो। एके 47 के अलावा जो दो पिस्टल बरामद की गई थीं, उनमें एक इटली मेड थी।