चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या तीन लाल बाबू यादव ने दोषी को 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले में फैसला न्यायालय ने छह साल बाद सुनाया है।
घटना खोड़ा थाना क्षेत्र में 26 फरवरी 2019 को हुई थी। पीड़िता के पिता ने पत्नी के बताने पर थाने में चार मार्च 2019 को एफआईआर दर्ज कराई। पीड़िता के पिता ने बताया था कि उसकी चार वर्षीय बेटी घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान राहुल उर्फ छोटू पुत्री को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। थाना पुलिस ने मामले की शिकायत के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। दो मई 2019 को मामले में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। अभियुक्त की ओर से न्यायालय में कहा गया कि मामला लेनदेन का है और एफआईआर भी देरी से दर्ज कराई गई है। वहीं, पीड़िता ने न्यायालय में अभियुक्त राहुल के खिलाफ बयान दर्ज कराए। साथ उसके पिता ने भी बयान दिए। विशेष लोक अभियोजक सतीश शर्मा ने बताया कि यह अपराध गंभीर प्रकृति का है, इसके खिलाफ मौखिक साक्ष्य के रूप में पीड़िता और उसके पिता के बयान दर्ज कराए गए हैं। न्यायालय ने पीड़िता के बयानों के आधार पर राहुल उर्फ छोटू को धारा 376 एबी के तहत दोषी पाते हुए 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही कहा कि अगर दोषी की ओर से समय पर 25 हजार रुपये का जुर्माना नहीं जमा कराया जाता है तो उसे चार माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी।
क्या है धारा 376 एबी
धारा 376 एबी भारतीय दंड संहिता की धारा है। 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म के लिए सजा से संबंधित है। इस धारा के तहत, यदि कोई व्यक्ति 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म करता है, तो उसे 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा दी जाती है। इसे आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक बढ़ाया जा सकता है।