1997 में लाइनपार क्षेत्र को पुराने शहर से जोड़ने के लिए बनाया गया गोशाला अंडरपास अब बरसात के तीन महीने लोगों के लिए परेशानी की वजह बनेगा। सामान्य दिनों में क्षेत्र के लोगों के लिए लाइफ लाइन माना जाने वाला अंडरपास बारिश होते ही ‘बैड लाइन’ बनकर शहर को दो हिस्सों में बांट देता है। इस अंडरपास के विलेन बनने की वजह करीब 19 साल पहले इसकी जल निकासी के लिए डाली गई ट्रंक लाइन है। निगम अफसरों ने एक बार डालने के बाद इस ट्रंक लाइन की सफाई नहीं कराई।
सफाई न होने से चोक हो चुकी ट्रंक लाइन में पानी अब धीरे-धीरे रिसता है जबकि बरसात होते ही लाखों लीटर पानी बहकर इस अंडरपास में जमा हो जाता है। इस पानी को निकलने में कभी-कभी 10 घंटे तक लग जाते हैं। इसी के चलते बरसात के दौरान गोशाला अंडरपास में होने वाला जलभराव शहर को दो हिस्सों में बांट देता है।
ट्रंक लाइन में जोड़े सीवर कनेक्शन
अंडरपास के लिए अलग ट्रंक लाइन डाली गई थी, ताकि बारिश का पानी सीधे हिंडन नदी में चला जाए। नगर निगम के जलकल विभाग ने कैला भट्ठा और आसपास की कालोनियों के सीवर कनेक्शन भी इसी लाइन में जुड़वा दिए। अब इस लाइन पर लोड ज्यादा हो गया है। कैला भट्ठा में कट्टी का मलबा भी इसी सीवर लाइन में डाल दिया जाता है। इसके चलते यह लाइन चोक हो गई।
सड़क निर्माण पर अरबों खर्च, इसके लिए फंड नहीं
नगर निगम ने बीते वित्तीय वर्ष में वार्डों में सड़क, नाली और सीवर निर्माण पर 125 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट खर्च किया है। नई सीवर लाइनें डाली जा रही हैं, लेकिन पुरानी लाइनों को मेंटेन नहीं किया जा रहा। अंडरपास से हिंडन नदी तक इस ट्रंक लाइन की सफाई 10 से 15 लाख रुपये खर्च कर निगम अपनी सुपर शकर मशीन से करा सकता है। हर साल लाखों की आबादी की परेशानी के बावजूद निगम अधिकारी इस पर गंभीरता नहीं दिखा रहे।
क्या कहते हैं मेयर
मेयर अशु वर्मा का कहना है कि निगम प्रशासन ने ट्रंक लाइन की सफाई के लिए अवस्थापना निधि से करीब 35 लाख रुपये पास करा लिए हैं। धनराशि मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। शुरुआत में सीवर लाइन साफ होगी। बाद में मेन लाइन को साफ किया जाएगा।
अंडरपास का इतिहास
1997 में हुआ था अंडरपास का निर्माण
करीब तीन किलोमीटर लंबी ट्रंक लाइन जाम होने से बनी समस्या
19 साल से नहीं हुई ट्रंक लाइन की सफाई
प्रताप विहार, विजय नगर समेत 20 से ज्यादा कालोनियों को जोड़ता है मुख्य शहर से
प्रतिदिन 60 से 70 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं अंडरपास से
अंडरपास में जलभराव से वाहनों को लगाना पड़ता है 10 किलोमीटर लंबा चक्कर
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