उधर, नगर निगम की ओर से अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है तो रामलीला कमेटी व पार्षद की ओर से भी पुलिस को शिकायत दी गई है। डीसीपी ऋजुल ने बताया कि अनिल कुमार को हादसे के बाद दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वहीं पर उनका इलाज चल रहा था। डीसीपी का कहना है कि आसपास के घरों में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है। उनसे हादसे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। नगर निगम की ओर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और पार्षद एवं रामलीला कमेटी की ओर से भी शिकायत दी गई है। पुलिस प्रत्येक पहलू की जांच कर रही है।
पुलिस ने बताया कि नगर निगम के कर निरीक्षक द्वितीय प्रभात शर्मा ने साहिबाबाद थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात लोगों ने बिना अनुमति के सामुदायिक केंद्र में पटाखे और बारूद रखा था। अनाधिकृत तरीके से सामुदायिक केंद्र में यह सामान रखा था। इससे उनके सामुदायिक केंद्र की इमारत क्षतिग्रस्त हो गई है। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
रोटी बनाते हुए रंगीन कागज ने पकड़ी थी आग
पीड़ित परिजनों ने बताया कि हादसे के दौरान राजू हीटर पर रोटी बना रहा था। उसी समय चिंगारी पास में पड़े रंगीन कागज पर जाकर गिरी तो उसने आग पकड़ ली। इसके बाद आग लगी और बारूद के अलग-अलग ढेरों तक पहुंच गई। इस वजह से एक के बाद एक पांच धमाके हुए।
यह था मामला
शनि चौक पुलिस चौकी से 100 मीटर की दूर बने सामुदायिक केंद्र में सोमवार सुबह 9:20 बजे रावण का पुतला तैयार करते हीटर से चिंगारी पास में रखे बारूद तक पहुंच गई। इससे एक के बाद एक पांच धमाके हुए और सात लोग झुलसकर घायल हो गए थे। इनमें हापुड़ के रमपुरा गांव निवासी ठेकेदार अनिल कुमार और उनके बेटे ऋषभ और रजत, महेंद्र, राजू आदि समेत सात लोग चपेट में आए थे। दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल में रजत उर्फ रानू और राजू तो ऋषभ और महेंद्र का सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा है।
अनिल 30 साल से बनाते थे पुतला
हापुड़ के पिलखुवा निवासी अनिल के भाई कपिल ने बताया कि रावण का पुतला बनाने का काम उनका पुश्तैनी है। अनिल पहले दादा और फिर पिता जगदीश के साथ पुतला बनाने का काम 30 साल से करते हुए आ रहे थे। पिछले 10 साल से तो वह गाजियाबाद के लाजपत नगर रामलीला समिति के लिए हर साल वह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले बनाते रह हैं। सोमवार तक तीन दिनों में कारीगरों ने केवल रावण का ही हाथ और पेट ही बन पाया था। बाकी दोनों पुतले बाद में बनाए जाने थे। कपिल ने बताया कि अनिल की पत्नी सीमा एक हादसे के बाद दिव्यांग हो गईं, उनके एक हाथ में केवल एक ही अंगुली है। वहीं, पांच बेटे हैं, उनमें ऋषभ (29), रजत उर्फ रानू (25), लक्की (21), निखिल उर्फ पंकज (19) और लव (7) हैं। दोनों बेटों को पिता की मौत की जानकारी नहीं है। वहीं, शाम करीब चार बजे अनिल का शव मोहल्ले में पहुंचा तो कोहराम मच गया। देर शाम पिलखुवा में उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों का कहना है कि वह केवल पुतला बनाने का काम करते हैं, लेकिन बारूद के बारे में जानकारी नहीं है कि उनके कमरे में कैसे आया।
काम के साथ सीजीएल की तैयारी कर रहा रजत
परिजनों के अनुसार घायल रजत पहले यूपीएससी की तैयारी करता था, लेकिन सफलता न मिलने से वह अब हापुड़ में सीजीएल की तैयारी में जुट गया। हालांकि वह पुतले बनाने के काम में पिता की मदद करने के लिए ही लाजपत नगर गया था। उनका कहना है कि ये उनका सीजन होता है तो उसमें पूरा परिवार एक जुट होकर पुतले तैयार करता है।