गाजियाबाद। प्रदूषण का स्तर और ठंड बढ़ने के साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। ओपीडी और इमरजेंसी को मिलाकर रोजाना 150-200 स्वांस रोगी पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को दोनों अस्पतालों की ओपीडी को मिलाकर लगभग तीन हजार मरीज पहुंचे। इसमें 20 फीसदी मरीज अस्थमा और फेंफड़ों में संक्रमण के शामिल हैं। अस्थमा रोगियों की समस्या बढ़ने के बाद दवाओं की डोज बढ़ानी पड़ रही है साथ ही जिनकी समस्या काफी गंभीर हो रही है उनको इनहेलर लेने की सलाह दी जा रही है।
प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ-साथ सरकारी और निजी अस्पतालों में रोगियों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। पुराने अस्थमा रोगियों की समस्या भी बढ़ने लगी है। इसमें ब्रान्काइटिस के मरीज भी शामिल हैं। बाल रोग विशेषज्ञों के पास भी बच्चों में एलर्जिक निमोनिया की समस्या अधिक आ रही है। शुक्रवार को एमएमजी अस्पताल में कुल 1901 मरीज पहुंचे जिसमें 865 महिलाएं और 722 पुरुष शामिल रहे। इसके अलावा 314 बच्चे भी पहुंचे जिसमें निमोनिया और फेफेड़ों में संक्रमण के मरीज अधिक रहे। एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संतराम ने बताया कि मौसम में बदलाव और प्रदूषण स्तर बढ़ने पर पुराने दमें के रोगियों और ब्रान्काइटिस के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। फेंफड़ों में इंफेक्शन, एर्लिजक साइनोसाइटिस के रोगी काफी आने लगे हैं। मरीजों में एंटीबायोटिक से लेकर अन्य दवाओं के डोज बढ़ाने पड़ रहे हैं। कुछ लोगों को इनहेलर लेने की भी सलाह दी गई है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अर्चना सिंह ने बताया कि बच्चों में भी खांसी और एलर्जिक निमोनिया की समस्या काफी आ रही है। संयुक्त जिला अस्पताल में कुल 900 से अधिक मरीज पहुंचे जिसमें 150 से अधिक बच्चे शामिल रहे।