लोगों को स्वच्छता की सीख अब पक्षियों से मिलेगी। सरकार के स्वच्छ भारत मिशन में जल्द ही लोगों को गौरैया सफाई का संदेश देती नजर आएगी। प्रदेश सरकार के गौरैया संरक्षण अभियान के साथ ही वन विभाग ने इसको सफाई पसंद पक्षी स्वीकार किया है। गौरैया अपने रहने के स्थान पर ही नहीं, बल्कि उसके आसपास भी गंदगी नहीं होने देती है। घोंसले से यह बच्चों की गंदगी को भी दूर जाकर फेंक देती है।
मुख्यमंत्री ने एक मार्च से गौरैया बचाओ अभियान शुरू किया था। इसमें लोगों को चिड़ियों के लकड़ी के घोंसले बांटे गए थे। चिड़ियों ने अब इन कृत्रिम घोेंसलों को स्वीकार कर इनमें रहना शुरू कर दिया है। वन क्षेत्राधिकारी आसिफ शहजाद ने बताया कि विशेषज्ञों की जांच में पाया गया है कि गौरैया बेहद सफाई पसंद है। वह घोंसले में बिल्कुल गंदगी नहीं करती है। बच्चों के नीचे बिछाने के लिए वह पन्नी-कागज के टुकड़े या घास के चौड़े पत्ते बिछाती है। गंदे होने पर इनको घोंसले से बाहर निकालकर फेंक देती है।
गंदगी को घोंसलों से दूर जाकर गिराती है। गंदगी वाली घास पर वह बच्चों के लिए दाना भी नहीं रखती है। खुद साफ स्थान पर बैठती है।
डीएफओ डा. जोगासिंह ने बताया कि गौरैया की सफाई की आदत लोगों को शिक्षा दे सकती है। इससे प्रेरित होकर वह सफाई के लिए कमर कस सकेंगे।
स्वच्छ भारत मिशन के विज्ञापन में गौरैया के शामिल होने से लोगों को सफाई का संदेश मिलेगा और गौरैया संरक्षण अभियान भी सफल होगा। जल्द ही इसको स्वच्छता की ब्रांड एंबेसडर के रूप में लोग विज्ञापनों में देखेंगे। वन विभाग की अपील सरकार ने स्वीकार कर ली है।