एमओयू पर साइन करने को जीडीए तैयार नहीं
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गाजियाबाद। सिटी फॉरेस्ट को लेकर जीडीए और नगर निगम में एक बार फिर ठन गई है। नगर निगम ने चेतावनी दी है कि अगर जीडीए सिटी फॉरेस्ट को लेकर एमओयू साइन नहीं करेगा तो वह फॉरेस्ट वापस ले लेगा। इस पर जीडीए का कहना है कि निगम चाहे तो फॉरेस्ट वापस ले ले लेकिन वह एमओयू पर साइन नहीं करेगा।
जीडीए सचिव रविंद्र गोडबोले ने बृहस्पतिवार को कहा कि जीडीए ने आमदनी के लिए नहीं बल्कि आम जनता को हरियाली उपलब्ध कराने के लिए सिटी फॉरेस्ट का निर्माण किया है। एमओयू साइन करने पर निगम अनावश्यक दखल देगा जो सिटी फॉरेस्ट की बेहतरी में नहीं होगा।
उन्हाेंने कहा कि निगम की नजर फॉरेस्ट की आय पर है जबकि हकीकत यह है कि फॉरेस्ट के रखरखाव व विकास पर सालाना 6 करोड़ रुपये खर्च होता है और सालाना आय की राशि महज पांच लाख है।
उन्होंने कहा कि वैसे निगम की तरफ से एमओयू पर साइन करने का उन्हें कोई अनुरोध पत्र नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि निगम से एनओसी लेकर निगम की जमीन पर सिटी फॉरेस्ट विकसित किया गया है।
सिटी फॉरेस्ट चलाने में निगम सक्षम : मेयर
मेयर अशु वर्मा ने कहा कि जीडीए ने अगर एक महीने के अंदर एमओयू पर साइन नहीं किया तो निगम एक्शन लेगा। उन्होंने कहा कि जीडीए से यह करार हुआ था कि सिटी फॉरेस्ट बनने के बाद प्रबंधन में आधी-आधी भागीदारी होगी, अब जीडीए इससे मुकर रहा है।
उन्हाेंने कहा कि सिटी फॉरेस्ट को चलाने में निगम सक्षम है। 25 जून को होने वाली निगम बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी बता दें कि जीडीए और नगर निगम के बीच एमओयू पर विवाद पिछले तीन वर्षों से चल रहा है।