एडीज मच्छर का प्रकोप अब पैर पसारने लगा है। शुक्रवार को एक साथ डेंगू और चिकनगुनिया के पांच मरीजों की पुष्टि हुई है। डेंगू के साथ ही चिकनगुनिया का खौफ फैल रहा है। तीन साल से चिकनगुनिया का कोई मरीज नहीं मिला था।
अब एक साथ तीन मरीज मिलने से अफसरों में हड़कंप मचा है। स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए सभी अस्पतालों को चिकनगुनिया की रिपोर्ट सैंपल के साथ एमएमजी लैब में भेजने के निदेश दिए हैं।
शुक्रवार को सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल ने गाजियाबाद में तीन चिकनगुनिया के मरीजों सहित दो डेंगू के मरीजों की पुष्टि की है। शहर के विजयनगर में रहने वाली वर्षा (23 वर्ष) और नोएडा के प्रदीप (36) की रिपोर्ट में चिकनगुनिया की पुष्टि हुई है।
इनके अलावा एक मरीज की प्राइवेट अस्पताल ने पुष्टि की है। प्राइवेट से लेकर सरकारी अस्पतालों तक में चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। मरीजों में हाई फीवर, जोड़ों में दर्द के साथ पचास फीसदी मरीजों में शरीर पर लाल चकत्ते दिखाई दे रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों की भरमार है।
आलम यह है कि संयुक्त जिला अस्पताल में एक बेड पर दो-दो मरीज हैं। इसके अलावा मरीजों को बेंच और स्ट्रेचर पर भी रखा गया है। सीएमएस डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि अस्पताल में सबसे अधिक जोड़ों में दर्द के साथ हाई फीवर के मरीज आ रहे हैं। ऐसे में बेड की कमी हो गई है।
इसके बावजूद मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि चिकनगुनिया और डेंगू में बहुत ही मामूली फर्क होता है। यह रोग एक ही मच्छर के काटने से होता है।
फिजिशियन डॉ. अंशुल वार्ष्णेय ने बताया कि चिकनगुनिया में बुखार के साथ शरीर के जोड़ों में बहुत तेज दर्द होता है। इसे सह पाना मरीज के बस के बाहर होता है, इसमें प्लटलेट्स 80 हजार से कम नहीं होता, जबकि डेंगू में तेज बुखार के साथ सिर दर्द और प्लेटलेट्स 20 हजार से भी कम हो जाता है। चिकनगुनिया के रोगी को ठीक होने में 25 दिन से एक महीने तक का समय लग सकता है।
चिकनगुनिया के लक्षण
- तेज बुखार, सिर दर्द
- मांसपेशियों और जोड़ों में असहनीय दर्द
- प्लेटलेट्स 80 हजार तक
- आंखों के पीछे तेज दर्द होना
डेंगू के लक्षण
- तेज बुखार, सिर दर्ज, मांस पेशियों और जोड़ों में दर्द
- जी मचलना, उल्टी होना, आंखों में दर्द
- गंभीर अवस्था में नाक, मुंह व मसूड़ों से खून आना
डेंगू-चिकनगुनिया से बचाव
- पानी से भरे हुए बर्तनों व टंकियों आदि को ढक कर रखें
- सप्ताह में एक बार कूलर को खाली करके सुखा दें
- यह मच्छर दिन के समय काटता है। पूरे कपड़े पहने
- उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है
- बुखार उतारने के लिए पैरासिटामोल ले सकते हैं
- एस्प्रीन या ब्रुफेन का इस्तेमाल न करें
चिकनगुनिया का टेस्ट होता है महंगा
चिकनगुनिया का प्राइवेट लैब में टेस्ट काफी महंगा पड़ता है। पीसीआर टेस्ट तीन से चार हजार में होता है। इस टेस्ट में फीवर के मरीजों का टेस्ट कराने पर एक से दो दिनों में पॉजिटिव रिपोर्ट पता चल जाती है। दूसरा आईजीएम टेस्ट होता है जो किट से होता है। यह भी आठ सौ से एक हजार रुपये में होता है। इसमें जब तक शरीर में एंटीबॉडीज नहीं बनती क्लीयर रिपोर्ट नहीं आती है। इसमें पांच से सात दिन लग जाते हैं।
तीन स्थानों पर मिले डेंगू के लार्वा
डेंगू सर्वे अभियान में चार स्थानों पर डेंगू के लार्वा पाए गए। इसमें से घूकना, नंदग्राम और डासना में डेंगू की ब्रीडिंग पाई गई। इनमें से सभी रिहायशी इलाके थे, जिनमें से गमलों आदि में ब्रीडिंग पाई गई है।
मच्छरों से निपटने को निगम नहीं तैयार
बरसात के सीजन में मच्छरों की फौज तैयार हो गई है। इसकी वजह से डेंगू और अब चिकनगुनिया के कई मरीज सामने आ चुके हैं। मच्छरों की वजह से बुखार भले ही फैल रहा है, लेकिन निगम का स्वास्थ्य विभाग अभी इनसे निपटने को तैयार नहीं है।
अभी निगम की ओर से न तो फॉगिंग कराई जा रही और न ही एंटी लार्वा दवा का छिड़काव। निगम ने अभी तक फॉगिंग का शेड्यल भी तैयार नहीं किया है। फॉगिंग न होने की वजह से मच्छरों की तादाद तेजी से बढ़ रही है।
इसकी वजह से लोग परेशान है। हालात यह है कि शाम के वक्त बच्चे पार्कों में जाने से भी कतराने लगे हैं। उधर, निगम अधिकारी सितंबर महीने से फॉगिंग कराने का दावा कर रहे हैं। अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा का कहना है कि फॉगिंग मशीनें तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं। बड़ी मशीनों से मुख्य मार्गों पर और छोटी मशीनों से वार्डों की अंदरूनी सड़कों पर फॉगिंग कराई जाएगी।