आदेश में यह भी कहा गया है कि बचाव पक्ष के अधिवक्ता अभियुक्त के साथ रह सकते हैं, लेकिन वे पुलिस की कार्रवाई में कोई बाधा नहीं डालेंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पुलिस की पहली रिमांड याचिका है और पहले इसे खारिज नहीं किया गया था। अभियुक्त को जेल से पुलिस अभिरक्षा में लेने से पहले और वापस भेजने से पहले मेडिकल परीक्षण अनिवार्य होगा।
सोमवार को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस ने कहा कि हर्षवर्धन के पास से भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की मोहर लगे कुछ दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी सत्यता संदिग्ध है। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे, जिससे वे कूटरचित प्रतीत हो रहे हैं। पुलिस को उन व्यक्तियों की तलाश करनी है जो ये मोहरे इस्तेमाल कर रहे थे।
इसके लिए हर्षवर्धन को दिल्ली और गुजरात भी ले जाया जाएगा। इसके अलावा, आरोपी के पास से एक डायरी मिली है, जिसमें कुछ विदेशी कंपनियों और लेनदेन की जानकारी है। पुलिस इन कंपनियों से जुड़े दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी एकत्र करना चाहती है। एक निवेशक ने यह भी आरोप लगाया है कि हर्षवर्धन ने कुछ मित्र राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को बिना अनुमति अपने घर में ठहराया था, और उसने कई अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के नाम भी बताए हैं।