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बैंकों में लगे सीसीटीवी कैमरे नहीं करते काम

Fri, 16 Dec 2016 11:53 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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बैंक - फोटो : अमर उजाला
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बैंकों में लगे सीसीटीवी कैमरे नोटबंदी के दौरान कारगर साबित नहीं हो रहे है। ज्यादातर  बैंकाें के सभी कैमरे चालू हालत में नहीं है। सूत्रों की मानें तो करीब 20 से 25 प्रतिशत कैमरे खराब ही रहते हैं जबकि कुछ ही बैंकोंके बाहर कैमरा लगा है।
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एटीएम के अंदर कैमरा होने के साथ ही बाहर भी कैमरों का टोटा है। बैंकों में तीसरी आंख न होने से नोटबंदी के बाद से चल रही धांधलियों को पर आरबीआई का नजर रखना मुश्किल ही होगा।  

सिर्फ नोटबंदी के दौरान बैंक कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए ही नहीं बल्कि बैंक और एटीएम में सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी सीसीटीवी कैमरे लगे होने बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन भी इस संबंध में कई बार बैंकाें को चेतावनी दे चुका है।
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खासतौर से लूटपाट होने की स्थिति में बदमाशों को पकड़ने के लिए इन्हीं कैमरों की मदद ली जाती है। उधर, सूत्रों के मुताबिक नोटबंदी के बाद से बैंकों में जो धांधली हुई है, उसे सीसीटीवी दुरुस्त रहते रोका जा सकता था। अधिकतर बैंक 90 दिनों तक कैमरों की रिकार्डिंग रखते हैं। उसके बाद ही पुरानी वीडियो को खत्म किया जाता है।

बैंक ऑफ इंडिया के चीफ मैनेजर अनिल कुमार जैन के मुताबिक कैमरों की मदद से काफी मदद मिलती है। बैंक  प्रबंधन ने एक कैमरा मेन गेट पर भी लगाया है। ताकि बाहर लगी लाइन को भी देखा जा सके। इन्हीं कैमरों की मदद से मॉनिटरिंग होती है।

उधर, एडीएम वित्त एवं राजस्व राजेश यादव का कहना है कि प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि बैंक में सीसीटीवी कैमरा हर जगह लगाया जाए। एटीएम के अंदर और बाहर, बैंक के बाहर तो नाइट विजिन कैमरे लगाए जाने का निर्देश दिया गया है। अगर कोई बैंक ऐसा नहीं कर रहा है तो नोटिस भेजकर कार्रवाई की जाएगी।

 कैश न मिलने पर महरौली में लोगों ने किया हंगामा
महरौली स्थित बैंक ऑफ इंडिया में कैश न मिलने पर लोगों ने कुछ समय के लिए एनएच 24 पर जाम लगा दिया। लोगों का आरोप है कि घंटों लाइन में खड़े होने के बाद भी कैश नहीं मिल पा रहा है।

जबकि बैंक मैनेजर बीबी शर्मा ने बताया कि कैश बीते तीन दिन से नहीं आ रहा है। बाहरी स्रोतों से रुपये एकत्र कर लोगों को दिया जाता है। नियमित रूप से करेंसी आएगी तो यह समस्या नहीं होगी।

 बैंकों के बाहर लग रही है लाइनें
कैश के लिए अधिकतर बैंकाें के बाहर लाइन लग रही है। बृहस्पतिवार को भी पर्याप्त कैश नहीं मिला। अधिकांश बैंकों में लोगों को 5 से 10 हजार रुपये ही दिए गए जबकि करंट एकाउंट में 15 से 20 हजार रुपये तक दिए गए।

जबकि सरकार ने लिमिट 50 हजार रुपये कर रखी है। सबसे ज्यादा दिक्कत सेविंग एकाउंट वाले खाता धारकों की है, जिनका बिना कैश के घर का खर्चा नहीं निकल पा रहा है।

- बोले लोग 
- नई करेंसी के लिए कहां जाए। बैंक के पास कैश नहीं। बाहर जाते हैं तो हर दुकानदार नई करेंसी मांगता है। ऋषिपाल, महागुन सोसायटी
- गांव में वैसे भी बैंकों को कम कैश दिया जा रहा है। सुबह से लाइन लग जाती है। जब नंबर आता है तो कैश ही खत्म हो जाता है। दीपक भारद्वाज, महरौली
- घर के छोटे-मोटे कामकाज के लिए नकद रुपये ही दिए जाते हैं। सब्जी वाला, दूध, किराना की दुकानों से नकद रुपये न दिए तो सामान भी नहीं मिलेगा। जरीना, महरौली

नोटबंदी के विरोध में विपक्षी दलों का तहसील पर धरना
 नोट बंदी के विरोध में कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने शुक्रवार को तहसील पर धरना दिया। पार्टी पदाधिकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा, जिसमें लोगों की परेशानी जल्द दूर न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।

धरने में शामिल पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को राजनीतिक स्टंट करार दिया। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी ने 50 दिनों में स्थिति सामान्य हो जाने की बात कहीं थी, लेकिन स्थिति बिगड़ती जा रही है।

बैंक और एटीएम बिना कैश के खाली पड़े है। धरने के बाद नेताओं ने एसडीएम अतुल कुमार को ज्ञापन सौंपा। धरने में मुख्य रूप से ओमकार प्रधान, संजय गुप्ता, कांग्रेसी नेता सुनील शर्मा, पूर्व निवाड़ी चेयरमैन अनिल त्यागी, रालोद नेता, बिट्टू खंजरपुर, राम भरोसे मोर्य, सपा नेता प्रदीप बोस, सुरेंद्र त्यागी, प्रदीप शर्मा, नत्थू सिंह, नवाब सोनी और महावीर प्रसाद आदि मौजूद रहे।

 जिला सहकारी बैंक प्रबंधक का किया घेराव
कैश की किल्लत के चलते लोगों ने गोविंदपुरी स्थित जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक नरेश शर्मा का आधे घंटे तक घेराव किया। बाद में प्रबंधक द्वारा लोगों को बताया गया कि कैश की किल्लत स्थानीय स्तर पर नहीं है।

ऊपर से ही पैसा नहीं आ रहा है। बैंक प्रबंधक की बात समझने के बाद लोग शांत हुए। उधर, कैश की किल्लत के चलते लोगों ने कलछीना स्थित इलाहाबाद बैंक पर हंगामा किया। बाद में पुलिस के समझाने पर लोग शांत हुए।
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