बच्चों में मोतियाबिंद का कारण
ट्रॉमेटिक मोतियाबिंद: खेलते समय या किसी खेल के दौरान बच्चे को लगी कोई भी चोट मोतियाबिंद का कारण बन सकती है। अगर चोट लगने के समय नहीं तो कुछ वर्षों के बाद मोतियाबिंद हो सकता है।
जन्मजात मोतियाबिंद: जन्म के समय या बचपन में भी बच्चों को मोतियाबिंद होने की संभावना होती है। यह परेशानी एक साथ दोनों आंखों में भी हो सकती है। लेकिन, इस मोतियाबिंद को हटाने की जरूरत नहीं पड़ती और इससे देखने में भी कोई परेशानी नहीं होती। रेडिएशन मोतियाबिंद : बच्चे के रेडिएशन के संपर्क में आने के कारण होने वाले मोतियाबिंद को रेडिएशन मोतियाबिंद के रूप में जाना जाता है।
माध्यमिक मोतियाबिंद: डायबिटीज या किसी अन्य बीमारी के कारण होने वाले मोतियाबिंद को सेकेंडरी मोतियाबिंद माना जाता है, साथ ही कुछ दवाओं और स्टेरॉयड के उपयोग से भी ये समस्याएं हो सकती हैं।
बच्चों में मोतियाबिंद के लक्षण
दृष्टि का कमजोर होना: इससे बच्चे को लोगों और अन्य वस्तुओं को देखने में कठिनाई होती है
भैंगापन: दोनों आंखों का अलग-अलग दिशाओं में इशारा करने के लक्षण होने पर भी मोतियाबिंद होता है।
तीव्र नेत्र गति: निस्तागमुस की परेशानी होने पर आंखों की गति को तेज कर देता है जैसे पलकें झपकाना और हिलना।
रंगों का फीका दिखना, धुंधली नजर, आंखों को रोशनी बहुत तेज लगना, दृष्टि कम हो जाना