महिला स्पेशल पिंक ऑटो का परमिट लेने में लोग रुचि नहीं ले रहे हैं। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता और महिला सुरक्षा से जुड़ी इस परिवहन सेवा में लोग रुचि नहीं ले रहे हैं। बढ़ते महिला अपराधों के चलते पिंक ऑटो चलाने की घोषणा की गई थी। ऑटो चालकों का मानना है कि पिंक ऑटो से कारोबार कम होगा, जबकि सामान्य ऑटो से अच्छी कमाई होती है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले साल महिला सुरक्षा के लिए पिंक ऑटो चलाने के आदेश दिए थे। इसके चलते परिवहन आयुक्त के.रविंद्र नायक ने परिवहन अफसरोें के साथ बैठक कर इस सेवा को शुरू करने को कहा था। तीन महीने पहले आरटीए की बैठक में कमिश्नर के आदेश के बाद पिंक ऑटो को शुरू करने की घोषणा कर दी गई।
आरटीओ आफिस में पिंक ऑटो के परमिट के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है। अफसरों का कहना है कि पिंक ऑटो में सिर्फ महिलाएं ही यात्रा करेंगी। यही वजह है कि कोई आगे नहीं आ रहा है। आरटीओ मयंक ज्योति ने बताया कि शुरुआत में 25 ऑटो को परिमट दिया जाना था। शहर में ऑटो के परमिट पर तीन साल से रोक लगी है।
ऐसे में पिंक ऑटो का परमिट लेने के लिए लोग बड़ी संख्या में आगे आ सकते थे। ट्रांसपोर्ट अफसरों की लापरवाही से मोदीनगर, मुरादनगर और लोनी के परमिट वाले शहर में दौड़ रहे हैं।
ऐसे में लोग पिंक ऑटो का परमिट लेने की बजाय लोनी के परमिट को प्राथमिकता देते हैं। आरटीओ की ओर से पिंक ऑटो को लेकर जागरूकता अभियान भी नहीं चलाया है। ऐसे में ज्यादातर लोगों को पिंक ऑटो की जानकारी भी नहीं है।