गाजियाबाद। जनपद के सरकारी अस्पतालों में कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं होने से हृदय रोगियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनवरी में उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देश के दो माह बीत जाने के बाद भी विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में मरीजों का इलाज फिजिशियन के भरोसे चल रहा है। गंभीर हालत में उन्हें हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।
एमएमजी अस्पताल में रोजाना ढाई से तीन हजार मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। इनमें 40 से 50 मरीज सीने में दर्द, सांस फूलने और रक्तचाप जैसी समस्याओं से ग्रसित होते हैं। संयुक्त जिला अस्पताल संजयनगर में प्रतिदिन 900 से 1000 मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिनमें 10 से 15 हृदय रोगी होते हैं।
विशेषज्ञ की अनुपलब्धता के कारण इन मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दिल्ली के अस्पतालों के लिए भेज दिया जाता है। इससे समय और धन दोनों का नुकसान हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी एक बड़ी समस्या है। अधिकारियों का कहना है कि कम वेतन के कारण डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में आने से बचते हैं।
सीने में दर्द होने पर रेफर किया दिल्ली
साहिबाबाद निवासी 58 वर्षीय रामकिशन को पिछले सप्ताह अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। परिजन उन्हें तुरंत एमएमजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां मौजूद फिजिशियन ने प्राथमिक जांच के बाद हार्ट अटैक की आशंका जताई, लेकिन कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण दिल्ली रेफर कर दिया।
बड़े अस्पताल जाने को कह वापस किया
आकाश नगर की रहने वाली 45 वर्षीय शबीना को कई दिनों से सांस लेने में दिक्कत और रक्तचाप की समस्या थी। वह संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचीं, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं मिला। फिजिशियन ने दवाएं देकर उन्हें बड़े अस्पताल जाने की सलाह दी।
जल्द नियुक्ति का दावा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन का दावा है कि कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि जब तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक दिल के मरीजों को समय पर समुचित इलाज मिलना मुश्किल बना रहेगा।