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तीन साल बाद छात्रा को न्याय : मां बोलीं- दरिंदों को फंदे पर लटकते देख मिलेगा चैन

Thu, 25 Mar 2021 06:20 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर

सार

- तीन साल, दो महीने और 23 दिन बाद मृतका के परिजनों को मिला न्याय
- फैसला आते ही पीड़ित माता और पिता के छलक पड़े आंसू
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bulandshahr case - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोर्ट में फैसला सुनते ही बिटिया के माता-पिता की आंखें छलक उठीं। तीन साल, दो माह और 23 दिन बाद उन्हें न्याय मिला। न्यायालय से बाहर आते वक्त आंखों में आंसू लिए बिटिया की मां ने कहा कि मैंने अपनी बेटी को कफन में देखा है, जब तक दरिंदों को फंदे पर लटकते हुए न देख लूं, तब तक चैन नहीं मिलेगा। 

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एडीजे/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम राजेश पाराशर की न्यायालय में बुधवार को मृतक छात्रा के माता-पिता व अन्य लोग भी मौजूद थे। एक ओर आरोपी खड़े थे। न्यायालय ने जैसे ही तीनों अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई तो पीड़ित मां की आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी।

वहीं, पिता की आंखें भी नम हो गईं। न्यायालय से बाहर आते ही मामले की वादी और मृतका की मां ने कहा कि वह अपनी बेटी को दुल्हन के जोड़े में देखने का सपना संजोये हुई थी लेकिन दरिंदों ने उसे मौत की नींद सुला दिया। न्यायालय से मेरी बेटी को इंसाफ मिला है। तीनों दरिंदों को फांसी मिलने के बाद ही मुझे चैन मिलेगा। मृतका के पिता ने भी फैसले का सम्मान किया।
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काम छूटा, सहायता राशि का भी कर लिया गबन
पीड़ित पिता ने बताया कि वारदात से पहले उनके परिवार में खुशियां ही खुशियां थीं लेकिन बिटिया के साथ हुई वारदात के बाद परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। वारदात के बाद मामले की पैरवी करनी शुरू की तो केरल में चल रहा उनका कारोबार ठप हो गया। सरकार से पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद मिली तो लगा कि परिवार को सहारा मिल जाएगा लेकिन एक आरोपी ने उनकी रकम को हड़प लिया। उसके दिए हुए चेक भी आज तक उनके पास रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि उसी दौरान हत्यारे आरोपियों की ओर से उन्हें जान का खतरा सताने लगा, आए दिन मिल रही धमकियों ने शहर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। जब उनके पलायन की खबरें प्रकाशित हुईं तो जिला पुलिस ने परिवार को सुरक्षा प्रदान करते हुए वापस बुलाया। 

देर से दर्ज हुए विवेचक के बयान, इसलिए निर्णय आने में हुई देरी
गौरतलब है कि वारदात दो जनवरी 2018 को हुई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में फाइल कर दी थी। मामले में विवेचक के बयान काफी समय बाद दर्ज हो सके थे। इसका एक कारण मामले के विवेचक रहे वर्तमान सीओ सिटी मऊ/तत्कालीन कोतवाली धनंजय मिश्रा का गैर जनपद स्थानांतरण होना था। सीओ सिटी मऊ  धनंजय मिश्रा ने फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि मामले की विवेचना में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी। न्यायालय का निर्णय जानकर काफी राहत मिली है। इस निर्णय से अपराधियों के मन में डर बैठेगा और वह अपराध करने से बचेंगे।

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