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यूपी में दर्दनाक हादसा: साइकिल का सपना अधूरा छोड़ गया सिद्धार्थ, जन्मदिन से पहले बुझ गया घर का चिराग

Mon, 18 May 2026 08:48 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादनगर

सार

सिद्धार्थ का 20 जुलाई को जन्मदिन था। वह कई दिनों से अपने पिता से साइकिल दिलाने की जिद कर रहा था। परिवार वालों के अनुसार उसे छोले-कुलचे खाना बेहद पसंद था। घर में उसकी मासूम बातें और शरारतें अब यादों में बदल गई हैं। मां मीनू का रो-रोकर बुरा हाल है।
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सिद्धार्थ तोमर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के मुरादनगर स्थित जलालाबाद गांव मार्ग गंगनहर पटरी पर रविवार को तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने स्कूटी सवार दो छात्रों को कुचल दिया। हादसे में कक्षा चार के छात्र की मौत हो गई, जबकि दूसरे छात्र की हालत गंभीर बनी हुई है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और अज्ञात वाहन की तलाश शुरू कर दी है।

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नहाने गंगनहर गया था सिद्धार्थ
थानाक्षेत्र भोजपुर के बढ़ायला गांव निवासी मोहित तोमर ने बताया कि वह स्कूटी से अपने बेटे सिद्धार्थ (11) और भतीजे मयंक तोमर (15) पुत्र देवेन्द्र के रविवार दोपहर मुरादनगर गंगनहर में नहाने के लिए आए थे। वह गंगनहर से नहाकर वापस अपने गांव जा रहे थे। जलालाबाद मार्ग पर रेलवे पुल से करीब एक किमी आगे पहुंचे तो सामने से आ रहे तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने स्कूटी में टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कूटी सवार तीनों दूर जा गिरे। 

मयंत की हालत गंभीर
सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल सिद्वार्थ व मयंक तोमर को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां सिद्वार्थ को मृत घोषित कर दिया गया। जबकि मयंक की हालत गंभीर बनी हुई है। मोहित कुमार ने बताया कि सिद्वार्थ कक्षा चार का छात्र था। जबकि मयंक कक्षा दस में पढ़ता है। एसीपी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से अज्ञात वाहन की तलाश की जा रही है।
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पापा जन्मदिन पर साइकिल दिला देना 
सिद्धार्थ का 20 जुलाई को जन्मदिन था। वह कई दिनों से अपने पिता से साइकिल दिलाने की जिद कर रहा था। परिवार वालों के अनुसार उसे छोले-कुलचे खाना बेहद पसंद था। घर में उसकी मासूम बातें और शरारतें अब यादों में बदल गई हैं। मां मीनू का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटे को याद कर वह बार-बार बेहोश हो रही है। दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बैठी मां को अब भी लगता है कि सिद्धार्थ दौड़ता हुआ आएगा और कहेगा मम्म मैं खेल के आ गया भूख लगी है, खाना दो। लेकिन इस बार दरवाजा खामोश है और घर में सिर्फ चीख-पुकार और मातम पसरा हुआ है।
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