गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में फ्लैट में ऑटो चालकों की लाश मिलीं हैं। दरवाजे अंदर से लॉक नहीं थे। बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। दोनों डीएलएफ कॉलोनी में किराये के फ्लैट में रहते थे।
गाजियाबाद के शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र के डीएलएफ कॉलोनी के फ्लैट में ऑटो चालक दो बुजुर्गों के शव मिले। उनमें से एक राकेश शर्मा(74) ने फ्लैट किराये पर ले रखा था। वहीं, दूसरे नेम सिंह (60) राकेश शर्मा का ऑटो चलाता था साथ ही उनकी देखभाल भी करता था।
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शुक्रवार सुबह फ्लैट से बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। दोनों परिवार से अलग इस फ्लैट में रहते थे।
प्राथमिक जांच के बाद पुलिस दोनों की मौत को स्वाभाविक मान रही है। हालांकि एक साथ दोनों की मौत के चलते पुलिस सही जानकारी के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
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एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सुबह करीब साढ़े सात बजे सूचना मिली कि डीएलएफ कॉलोनी, भगत सिंह चौक के पास फ्लैट से बदबू आ रही है। इसके बाद पुलिस टीम माैके पर पहुंची। फ्लैट के अंदर जाकर देखा तो में अलग-अलग बेड पर दो बुजुर्गों की डेड बॉडी मिली।
पुलिस ने मृतकों के पास से मिले आधार कार्ड से उनकी शिनाख्त की गई। उनकी पहचान दिल्ली के न्यू सीमापुरी के रहने वाले नेम सिंह (60) और दूसरे कमरे में दिल्ली के ही कांति नगर के रहने वाले राकेश शर्मा(74) के रूप में हुई।
आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि फ्लैट गुड़गांव में रहने वाले मुकेश नंदन का है। पुलिस को मुकेश नंदन ने बताया कि दोनों बुजुर्ग पिछले दो साल से फ्लैट में किराये पर रहते थे। दोनों की स्थिति अच्छी नहीं थी। दो महीने से किराया भी नहीं दिया था।
दोनों के शव दो से तीन दिन पुराने लग रहे थे। आसपास के लोगों को परिवार की कोई जानकारी नहीं थी। एसीपी ने बताया कि आधार कार्ड के आधार पर पुलिस टीम को उनके घर भेजा गया, लेकिन आधार कार्ड पर जिसका पता लिखा था वहां कोई उनके जाने वाला नहीं था।
पुलिस दोनों के परिजनों की तलाश कर रही है। एसीपी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का सही कारण पता चल सकेगा। फ्लैट का दरवाजा अंदर से खुला था। दोनों के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं मिले हैं।
राकेश शर्मा घर में बीमार पड़े रहते थे
आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया कि राकेश शर्मा और नेम सिंह दोनों ऑटो चलाते थे। राकेश शर्मा ने आयु ज्यादा होने के कारण अपना ऑटो नेम सिंह को किराये पर दे दिया था। नेम सिंह ऑटो चलाता था और राकेश शर्मा की देखभाल भी करता था।
राकेश शर्मा पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे और कुछ समय से उनकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी। राकेश शर्मा बेड से न तो उठ पाते थे और न ही बोल पाते थे। उन्हें बीमारी क्या थी और इलाज कहां से चल रहा था, इसका भी पता नहीं चल सका है। नेम सिंह शराब के आदि थे।
दोनों दरवाजे अंदर से नहीं थे लॉक
पुलिस ने बताया कि फ्लैट का दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। प्रवेश द्वार पर लोहे और लकड़ी वाले दोनों दरवाजे अंदर से लॉक नहीं थे। पुलिस के अनुसार शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं और फ्लैट में भी संघर्ष या चोरी जैसे कोई निशान नहीं मिले हैं। इस कारण पुलिस दोनों की मौत को स्वाभाविक मान रही है।
बीस साल से परिवार से अलग रह रहे थे दोनों
पुलिस के अनुसार राकेश शर्मा लगभग बीस साल से डीएलएफ कॉलोनी में अकेले रह रहे थे। नेम सिंह की पत्नी का लगभग 18 साल पहले देहांत हो गया था। इसके बाद वह अपने बेटे को बड़े भाई के सुपुर्द करके घर छोड़कर चले आए थे। पुलिस दोनों के परिवारों की तलाश में जुटी है।
सहायक पुलिस आयुक्त शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने बताया कि तीन मंजिला इमारत में प्रत्येक मंजिल पर तीन एलआईजी फ्लैट हैं। दोनों बुजुर्ग पहले इसी इमारत में पहली मंजिल पर रहते थे। लगभग दो साल पहले फ्लैट मालिक के फ्लैट बेचने के बाद दोनों तीसरी मंजिल पर गुड़गांव में रहने वाले मुकेश नंदन के फ्लैट में किराये पर रहने लगे थे।
मिलीं शराब की बोतलें
पुलिस के अनुसार फ्लैट में कुछ शराब की खाली बोतलें भी मिली हैं। नेम सिंह का शव फ्लैट के बाहर वाले कमरे में मिला, जहां पंखा चल रहा था। राकेश शर्मा का शव अंदर वाले कमरे में था, जिसमें पंखा बंद था। इस कारण राकेश शर्मा का शव ज्यादा खराब हो चुका था। पुलिस के अनुसार शराब के सेवन की जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही सामने आएगी।
15 दिन पहले गई थी पुलिस
राकेश शर्मा व नेम सिंह से मिलने 15 दिन पहले डीएलएफ पुलिस चौकी से पुलिसकर्मी गए थे। उस समय राकेश बिस्तर पर बीमार लेटे थे और दरवाजा खुला हुआ था। इस दौरान नेम सिंह भी नशे की हालत में फ्लैट पर पहुंचा था। पुलिस ने दोनों का हालचाल लिया था।