दिवाली को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी इंतजाम और अनुमान धरे रह गए। इस दिवाली पिछले चार वर्ष के प्रदूषण का रिकार्ड टूट गया। दिवाली के दिन गाजियाबाद में वायु प्रदूषण का स्तर मानकों से सात से नौ गुना तक अधिक दर्ज किया गया है।
दिवाली पर प्रदूषण मापने के लिए पीसीबी ने गाजियाबाद के मॉडल टाउन और वसुंधरा में मॉनीटरिंग स्टेशन स्थापित किया था। दोनों जगहों पर प्रदूषण के आंकड़े सात से नौ गुना ज्यादा रहे।
मॉडल टाउन में आरएसपीएम (धूल के महीन कण) का आंकड़ा 720 रहा। जबकि वसुंधरा में यह आंकड़ा 910 तक दर्ज किया गया। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले काफी ज्यादा रहा है।
पीसीबी के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके अग्रवाल ने बताया कि शुरूआत में प्रदूषण के दोगुने होने का अनुमान लगाया गया था। उन्होंने कहा कि मौसम में आर्द्रता की वजह से पीएम10 का स्तर ज्यादा रहा, जिससे धुआं फैलने की जगह नीचे रह गया और यही प्रदूषण का कारण बना।
ट्रांस हिंडन में 130 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर ज्यादा प्रदूषण
गाजियाबाद की अपेक्षा ट्रांस हिंडन में प्रदूषण अधिक रहा। गाजियाबाद के मुकाबले ट्रांस हिंडन में पीएम10 130 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर अधिक रहा। यही हाल सल्फर डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड का भी रहा।
मॉडल टाउन में सल्फर डाई ऑक्साइड 50 और ट्रांस हिंडन में 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रही। नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड मॉडल टाउन 51 और ट्रांस हिंडन में 75माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर मापी गई।
दिवाली से एक सप्ताह पूर्व काफी कम था प्रदूषण का स्तर
प्रदूषण विभाग ने दिवाली से पूर्व 24 अक्तूबर 2016 को प्रदूषण के आंकड़े लिए थे। इस दौरान मॉडल टाउन में एसओ2, 8, एनओ2 27, और पीएम10 350 आंका गया था। जबकि वसुंधरा में एसओ2 20, एनओ2 38 और पीएम10 320 रहा। इन आंकड़ों के अनुसार दिवाली से पहले टीएचए का प्रदूषण स्तर कम था। जबकि दिवाली के दिन टीएचए का प्रदूषण स्तर ज्यादा रहा। इससे पता चलता है कि टीएचए के लोगों ने गाजियाबाद के मुकाबले ज्यादा पटाखे जलाएं।
आसमान में छाई पटाखों का धुंध
दिवाली पर टीएचए के लोगों ने लाखों रुपये के पटाखे चलाए। सोमवार को पटाखों का धुआं सांस रोगियों के लिए परेशानी बना रहा। धुएं के चलते अगले कुछ दिनों तक अस्थमा रोगियों को अस्थमा अटैक का खतरा काफी बढ़ गया है।
दिवाली पर दिल खोलकर बम-पटाखों जलाने के बाद अब लोग अब सांस लेने में परेशानी, स्किन एलर्जी, जुकाम, खांसी और आंखों में जलन की समस्या से जूझ रहे हैं।
वातावरण में फैले बारूद के कण और धुआं लोगों को परेशान कर रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो इससे सांस रोगियों के लिए खतरा काफी बढ़ गया है, जबकि नवजात बच्चों के लिए भी ऐसे वातावरण में सांस लेेना नुकसानदेह है।
डा. केके पांडेय ने बताया कि दिवाली के कारण वातावरण में फैले प्रदूषण से अस्थमा मरीजों में अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसके साथ ही जिन मरीजों ने इनहेलर छोड़ दिया है, उन्हें भी इनहेलर की जरूरत पड़ सकती है। डाक्टरों ने सलाह दी है कि ऐसे लोग इन दिनों कम से कम बाहर निकलें, जिससे वे प्रदूषण की चपेट में न आएं।
दो दर्जन से अधिक लोग पटाखे जलाने के दौरान जले
दिवाली पर पटाखों से जले करीब दो दर्जन से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे। जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। राजेंद्र नगर ईएसआई अस्पताल में सोमवार को 17 ऐसे मरीज पहुंचे जो पटाखों से जले या आंख के आसपास पटाखे का बारूद लगने से परेशान रहे।
इसके साथ ही प्राइवेट अस्पताल में भी पटाखे जलाने के दौरान जले लोग पहुंचे। हालांकि गंभीर रूप घायल होने का मामला सामने नहीं आया।