गाजियाबाद। शादी से पहले कुंडली मिलान के साथ ही थैलेसीमिया की स्क्रीनिंग अवश्य कराएं। जिस तरह लोग शादी से पहले कुंडली मिलाते हैं, उसी तरह थैलेसीमिया की भी जांच करानी चाहिए, ताकि भावी पीढ़ी इस बीमारी से बच सके। सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी जागरूकता फैलाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन समाज को भी इस दिशा में अपनी भूमिका निभानी होगी। बीमारी के बारे में जागरूक करने के लिए नौ मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस के रूप में मनाया जाता है।
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा ने बताया कि शादी से पहले थैलेसीमिया की जांच कराने पर इससे बच्चों में होने वाली बीमारी के बारे में पहले से ही पता चल जाएगा। अगर माता-पिता दोनों थैलेसीमिया माइनर होते हैं, तो उनके बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने की संभावना 25 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। थैलेसीमिया मेजर बच्चों को जन्म के कुछ महीनों बाद से ही खून की जरूरत पड़ने लगती है और जीवनभर उन्हें नियमित रक्त चढ़वाना पड़ता है।
थैलेसीमिया रोगी को हमेशा थकावट, कमजोरी और संक्रमण का खतरा बना रहता है। यह बीमारी उस समय गंभीर हो जाती है जब शरीर में आयरन की अधिकता हो जाती है, जिससे लिवर, हृदय और अन्य अंगों पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे मरीजों को हर समय विशेष देखभाल और उपचार की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि एमएमजी अस्पताल में अब थैलेसीमिया की निशुल्क जांच सुविधा शुरू कर दी गई है, जहां पर लोग पहले से अपॉइंटमेंट लेकर या सीधे पहुंचकर अपनी जांच करा सकते हैं। यह सुविधा खासतौर पर विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने लोगों से अपील की है कि वे इस जांच को नजरअंदाज न करें और समय रहते जांच कराएं। थैलेसीमिया की समय पर पहचान और रोकथाम से एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की ओर कदम बढ़ाया जा सकता है।