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Ghaziabad News: इमरजेंसी में बेड खाली, स्ट्रेचर पर कराहते हैं मरीज

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जिला अस्पताल का खाली पड़ा इमरजेंसी वार्ड। संवाद
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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में बेड खाली होने के बाद भी मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। इस कारण इलाज के लिए आए मरीजों को स्ट्रेचर पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि सभी बेड मरीजों से भरे पड़े हैं, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार 60 से 75 बेड ऑक्यूपेंसी दर्शाया जा रहा है। इस रवैए से न केवल मरीज बल्कि उनके तीमारदार भी हताश और नाराज हैं।
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शनिवार को एमएमजी अस्पताल में 2316 मरीजों ने पंजीकरण कराया। इनमें 1105 महिलाएं, 810 पुरुष और 401 बच्चे थे। इन मरीजों में अधिकतर को वायरल फीवर, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, खांसी, जुकाम, स्किन एलर्जी, रक्तचाप, मधुमेह जैसी समस्याएं थीं। कई मरीज ऐसे भी थे जिन्हें लंबे समय से बुखार की शिकायत थी और प्राथमिक इलाज के बाद भी आराम नहीं मिला। वहीं, बच्चों में डायरिया और सर्दी-जुकाम के मामले अधिक सामने आए। इन बीमारियों से जूझते मरीजों को इलाज की जरूरत है लेकिन संसाधनों की कमी और अव्यवस्था के चलते उन्हें समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा। इमरजेंसी में 85 मरीजों का इलाज हुआ। इसमें से 112 मरीज भर्ती किए गए जबकि छह को रेफर करना पड़ा।

गंभीर मरीजों के लिए बेड रिजर्व का दिया हवाला
इमरजेंसी ड्यूटी में मौजूद ईएमओ डॉ. डीके वर्मा ने कहा कि इमरजेंसी के बेड किसी घटना-दुर्घटना के लिए रिजर्व रखे गए हैं। इसलिए सामान्य मरीजों को बेड पर भर्ती नहीं किया जा रहा है।
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पेट में दर्द और उल्टी-दस्त का मरीज दो घंटे तक स्ट्रेचर पर पड़ रहा
नंदग्राम निवासी भोला (48) को दो दिन से पेट में दर्द और उल्टी-दस्त की शिकायत हो रही थी। शनिवार को पत्नी ने इमरजेंसी में भर्ती कराया लेकिन उन्हें बेड नहीं दिया गया। वह स्ट्रेचर पर ही लेटे रहे। भोला ने दोपहर एक बजे बताया कि वह दो घंटे से स्ट्रेचर पर पड़े हैं।

इमरजेंसी से जाने के लिए बोला, नहीं मिला बेड
विजय नगर निवासी बुजुर्ग इलमचंद (85) को कई दिन से बुखार होने के साथ ही खांसी की परेशानी हो रही थी। उन्हें शनिवार को इमरजेंसी में भर्ती कर ग्लूकोज की बोतल लगा दी गई। कुछ देर के बाद उनसे कहा गया कि बेड खाली नहीं है। इसलिए उन्हें ले जाओ। पिता का इलाज कराने आए उनके बेटे ने बताया कि पिता के नाम से आयुष्मान कार्ड भी बना है लेकिन उन्हें बेड नहीं मिल पा रहा है।

मामले की होगी जांच
सीएमएस डॉ. राकेश कुमार का कहना है महिला वार्ड में बी-ब्लॉक बंद कर दिया गया है, इसके अलावा नेत्र रोग विभाग के 15 बेड भी खाली रहते हैंं। उन पर सिर्फ आंख के ऑपरेशन वाले मरीज भर्ती होते हैं। इसके अलावा ऑपरेशन के बाद छह बेड रिकवरी के खाली रहते हैं। यह बेड ऑक्यूपेंसी की क्षमता को कम करते हैं। सीएमएस का कहना है कि बेड खाली होने पर भी मरीजों को भर्ती नहीं गया तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी।
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