गाजियाबाद। कोरोना महामारी के कारण बेरोजगारी की मार सहने वाले युवा पांच लाख का ऋण लेकर उद्यमी बने और अब प्रतिमाह 50 हजार रुपये तक आय अर्जित कर रहे हैं। युवाओं ने सरकारी योजना से मिलने वाले अनुदान के सहयोग से ऋण लेकर गार्मेंट्स यूनिट, बुटीक समेत अन्य रोजगार से जुड़कर खुद को आत्मनिर्भर बनाया है। साथ ही दूसरों को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। खुद को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए युवाओं ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का ऋण लेकर उद्यम स्थापित किए थे। आज यह युवा अपनी यूनिटों में निर्मित उत्पादों की आपूर्ति कई शहरों के बाजारों में कर न्यूनतम 50 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रहे हैं। अधिकतर युवा स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी किए हैं।
गाजियाबाद के जी एंक्लेव निवासी तुलिका त्यागी ने बताया कि आर्थिक संसाधन की कमी एक बड़ी बाधा थी। लंबे समय तक उन्होंने प्राइवेट नौकरी की। लेकिन संतुष्टि नहीं मिल रही थी। इसके बाद शिविर के माध्यम से योजना के संचालन की जानकारी हुई, जिसके बाद आवेदन कर बैंक से पांच लाख रुपये का ऋण लेकर अपना एक बुटीक स्थापित किया। वर्तमान में वह अपने बुटीक के माध्यम से प्रतिमाह से 30 से 40 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
इसके अलावा राहुल कुमार ने बताया कि पहले वह चालक की नौकरी करते थे। योजना के तहत ऋण लेकर वर्तमान में वह अपना स्वयं का वाहन टैक्सी में चलाकर प्रतिमाह 50 हजार रुपये कमा रहे हैं।
नितिन कुमार गोला ने बताया कि उन्होंने पांच लाख रुपये का ऋण लेकर कपड़ों की एक यूनिट स्थापित की है। यूनिट में वह खुद के ब्रांड की टीशर्ट बनाकर देते हैं। इससे करीब एक लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। वर्तमान में वह तीन अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।