80 लाख की क्रेडिट लिमिट स्वीकृत करने के एवज में एक लाख रुपये लेने का आरोप
आठ सितंबर को होगी अगली सुनवाई
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। बुलंदशहर के शिकारपुर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में ऋण सीमा बढ़ाने के बदले रिश्वत लेने के मामले में बृहस्पतिवार को सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान सहारनपुर के चकराता निवासी इंडियन ओवरसीज बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी जोगिंद्र पाल ने अदालत में उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ सितंबर की तारीख तय की है।
मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकारपुर शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अंकित मलिक आरोपी हैं। सीबीआई के मुताबिक, उन पर 80 लाख रुपये की क्रेडिट लिमिट स्वीकृत करने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने और लेने का आरोप है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता जावेद ने सीबीआई को दी शिकायत में बताया था कि उनकी पत्नी समरीन ने महिला स्वावलंबन योजना के तहत 80 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था। आवेदन शिकारपुर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में जमा किया गया था। आरोप है कि ऋण स्वीकृत करने के एवज में शाखा प्रबंधक ने एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने 11 दिसंबर 2024 को ट्रैप कार्रवाई की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने शाखा प्रबंधक को एक लाख रुपये का चेक दिया था। चेक का भुगतान उसी दिन हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने खाते से रकम निकलने की जानकारी सीबीआई को दी।
सीबीआई के मुताबिक, जांच के दौरान शाखा प्रबंधक की मेज पर शिकायतकर्ता का चेक मिला था। वहीं मेज के नीचे रखी कूड़ेदान की बाल्टी से पांच-पांच सौ रुपये के नोटों की दो गड्डियां बरामद हुई थीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि रिश्वत की रकम को छिपाने का प्रयास किया गया था।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश भारत सिंह की अदालत में चल रही है। इससे पहले सोमवार को गवाह राजीव वशिष्ठ की गवाही और बचाव पक्ष की ओर से जिरह की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब बृहस्पतिवार को सेवानिवृत्त बैंककर्मी जोगिंद्र पाल के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए आठ सितंबर की तारीख निर्धारित की है।