नगर निगम में लापरवाही का आलम देखिए, निगम मुख्यालय की बिल्डिंग में संचालित यूनियन बैंक शाखा के किराएनामे के एग्रीमेंट की फाइल ही गायब हो गई। 14 साल से संपत्ति विभाग ने बैंक से किराया ही नहीं लिया।
एग्रीमेंट की शर्तों का ही नहीं पता तो किराया वसूला भी कैसे जाता। अब 14 साल बाद निगम अफसरों ने बैंक के साथ एग्रीमेंट की फाइल तैयार कर उनके अधिकारियों को सौंपी है। निगम का 40 लाख रुपया बैंक पर किराए के रूप में बकाया दर्शाया गया है।
नगर निगम मुख्यालय में वर्ष 2002 में यूनियन बैंक की शाखा खोली गई थी। निगम की बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर संचालित बैंक शाखा को शुरूआत में कम स्थान दिया गया था, बाद में इसे बढ़ाया गया। किराए पर जगह दिए जाने के साथ ही निगम ने बैंक के साथ एग्रीमेंट भी किया था।
इसी में शर्तों का निर्धारण और किराए की दर का भी ब्यौरा था। फिलहाल 125.47 वर्ग मीटर जगह में बैंक की यह शाखा संचालित है। संपत्ति विभाग ने बैंक से 2002 से अब तक 14 साल में एक बार भी किराया नहीं लिया।
यह हाल तब है जब नगर निगम वित्तीय कठिनाइयों से जूझ रहा है। अब निगम अफसरों को बैंक के किराए की याद आई तो फाइलें खंगाली गईं। संपत्ति विभाग का पूरा रिकार्ड छानने के बावजूद बैंक की फाइल नहीं मिली।
विभागीय अधिकारियों ने अभी निगम के उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी है। गुपचुप अब नई फाइल बनाकर बैंक से एग्रीमेंट साइन करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। निगम ने वर्ष 2002 से 31 अगस्त 2016 तक किराए की फाइल तैयार की है। इसके मुताबिक बैंक पर 40.49 लाख रुपया किराए के रूप में बकाया है।
700 से ज्यादा दुकानों की फाइलें भी हैं गायब:
नगर निगम की शहर में दो हजार से ज्यादा दुकानें व अन्य किराए की प्रॉपर्टियां हैं। इनमें से भी करीब 700 से ज्यादा दुकानों और अन्य संपत्तियों की पत्रावलियां गुम हैं। बीते दिनों यह मामला उजागर हुआ तो शासन ने इस पर जांच भी बैठा दी थी, हालांकि अभी तक न तो फाइलें मिलीं और न ही फाइलों के गुम होने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हुई।
नगर निगम अभी तक अपने रिकार्ड को कंप्यूटराइज्ड करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा। फाइलें कंप्यूटराइज्ड होती तो गुम न होती। जीडीए, आरटीओ समेत कई विभागों ने अपना रिकार्ड कंप्यूटराइज्ड कर लिया है।
मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। अब एग्रीमेंट की नई फाइल तैयार की गई है। निगम और यूनियन बैंक के बीच जल्द ही एग्रीमेंट हो जाएगा। किराया वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। - एमपी सिंह, संपत्ति प्रभारी, नगर निगम
मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। ऐसा है तो मामला गंभीर है। संपत्ति विभाग से रिपोर्ट ली जाएगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। - डीके सिन्हा, प्रभारी नगर आयुक्त
फाइल गायब होने की जानकारी नहीं है। मेरे कार्यकाल से पहले का प्रकरण है। बैंक की ओर से प्रत्येक 11 महीने में एग्रीमेंट का नवीनीकरण होता है। एग्रीमेंट की फाइल स्वीकृति के लिए मुंबई मुख्यालय को भेजी गई है। नियमानुसार किराए का भुगतान किया जाएगा। - नीतिका नागपाल, ब्रांच मैनेजर, यूनियन बैंक शाखा