श्री रामलीला समिति राजनगर द्वारा कराई जाने वाली रामलीला अपने आप में अनूठी है। शहर में यही एक ऐसी रामलीला है, जिसमें चौपाई गायन के साथ मंचन होता है। राजनगर में 1989 में पहली बार रामलीला का मंचन हुआ। इस रामलीला को 15 लोगों ने मिलकर शुरू किया था।राजनगर रामलीला का मुख्य आकर्षण रामलीला का मंचन है।
मेले से ज्यादा यहां लोग मथुरा से आए व्यास जी की चौपाई सुनने और उसके अनुसार ही रामलीला का मंचन देखने पहुंचते हैं। इस रामलीला में मनोरंजन के अन्य साधनों से ज्यादा रामलीला मंचन की व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाता है।
संस्थापक सदस्य रामगोपाल कौशिक ने बताया कि इस रामलीला की खासियत है कि इसमें गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामायण की चौपाई के आधार पर रामलीला का मंचन होता है। यहां रामलीला मंचन देखने के शौकीन लोग ही आते हैं।
शुरूआत के पांच साल तक वृंदावन के कलाकार ही रामलीला का मंचन करते थे, लेकिन उसके बाद से मथुरा से रामलीला की टीम आती है। उसके बाद से लगातार मथुरा से मथुरा दास चतुर्वेदी की मंडली ही रामलीला का मंचन करती आ रही है। अध्यक्ष राकेश मिश्रा ने बताया कि इस रामलीला का मुख्य उदेश्य रामायण का ज्ञान बेहतरीन मंचन के माध्यम से बांटना है।