गाजियाबाद। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान का असर शनिवार को लोगों की सेहत पर दिखाई दिया। जिले का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गर्मी बढ़ने के साथ ही जिला एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में सिरदर्द, उल्टी, दस्त, चक्कर और कमजोरी से परेशान मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में फिजिशियन की ओपीडी में आने वाले करीब 60 फीसदी मरीज गर्मी से जुड़ी परेशानियों के साथ पहुंच रहे हैं।
वरिष्ठ फिजिशियन व आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. वीबी जिंदल का कहना है कि तेज गर्मी में शरीर में पानी और जरूरी लवण तेजी से कम होने लगते हैं। लंबे समय तक धूप में रहने, कम पानी पीने और तला-भुना भोजन करने से डिहाइड्रेशन, लू, सिरदर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई मरीज चक्कर, घबराहट और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि गर्मी में शरीर को हाइड्रेट (तरलीकरण) रखना सबसे जरूरी है। लोग दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और ओआरएस, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और मौसमी फलों का सेवन करें। लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
एमएमजी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन उपाध्याय का कहना है कि बच्चों में गर्मी का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। कई बच्चे तेज धूप में खेलने के बाद बुखार, उल्टी और पेट खराब होने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। छोटे बच्चों के शरीर में पानी की कमी जल्दी होती है, इसलिए अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। बच्चों को धूप में खेलने से बचाएं और हल्का, पौष्टिक भोजन दें।
इनसे बीमारी का खतरा अधिक
गर्मी में बीमार होने का सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी की कमी, धूप में अधिक समय बिताना, दूषित पानी पीना और बाहर का अस्वच्छ खाना खाना है। सड़क किनारे कटे फल, बासी भोजन और खुले में मिलने वाले पेय पदार्थ संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं। इससे पेट संबंधी बीमारियां तेजी से फैलती हैं।
ऐसे करें गर्मी से बचाव
गर्मी में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, दही, छाछ, नारियल पानी और हल्का घर का बना भोजन खाना चाहिए। मौसमी फल और हरी सब्जियां शरीर को ठंडक देने में मदद करती हैं। वहीं, ज्यादा मसालेदार, तला-भुना भोजन, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक, अधिक चाय-कॉफी और बासी खाना खाने से बचना चाहिए। बाहर निकलते समय सिर ढककर रखें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, ताकि गर्मी का असर कम हो सके।