पशुओं पर क्रूरता रोकने के लिए कार्यरत संस्था पीएफए हर महीने 150 से 300 कुत्तों की नसबंदी कर उनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए काम कर रही है। संस्था की मानें तो इंदिरापुरम, मकनपुर और नंदग्राम में करीब 99 प्रतिशत कुत्तों को स्ट्रेलाइज्ड (बधियाकरण) किया जा चुका है।
अब संस्था कुत्तों की नसबंदी के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। दरअसल, इंदिरापुरम में कुत्तों के काटने के मामलों को लेकर यह संस्था आरडब्ल्यूए के निशाने पर है। बीते दिनों इंदिरापुरम के रेजिडेंट्स ने निगम में पहुंचकर समस्या हल कराने की मांग की थी।
ऐसे में संस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं, लेकिन पीएफए संस्था की जिला अध्यक्ष सुमेधा अय्यर का कहना है कि संसाधनों के अभाव में भी उनकी संस्था पशुओं की सेवा और कुत्तों की नसबंदी का अभियान पूरी क्षमता के साथ कर रही हैं।
कई महीनों से उन्हें निगम से गाड़ी भी नहीं मिल रही, बावजूद इसके किराए की गाड़ियों, ऑटो और दुपहिया वाहनों से भी डॉग को लिफ्ट कर अस्पताल तक लाकर उनकी नसबंदी कराई जा रही है। फिलहाल 5 से 6 कुत्तों की नसबंदी प्रतिदिन हो रही है।
इससे पहले जब गाड़ी थी तब प्रतिदिन का आंकड़ा 20 से 25 कुत्तों का था। उनका कहना है कि नसबंदी के दौरान निकाले गए कुत्तों के आर्गन्स (ओवरी और ट्यूब्स) के आधार पर निगम अधिकारी उनका सत्यापन करते हैं।
इसके बाद ही निगम की ओर से भुगतान किया जाता है। सुमेधा अय्यर का कहना है कि निगम से डॉग को लिफ्ट करने के लिए दो गाड़ियां मिलने का इंतजार है। गाड़ियां मिलने पर प्रतिदिन डॉग लिफ्ट कराने और नसबंदी की संख्या और बढ़ जाएगी।