कांवड़ यात्रियों की सुविधा के लिए वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से गंगनहर की पटरी के चौड़ीकरण के लिए घोषणा की गई थी। पटरी के लिए तैयार की गई परियोजना में करीब एक लाख से अधिक पौधों को काटा जाना तय किया गया था। इसके बाद मामला एनजीटी में पहुंचा और पेड़ काटने से रोकने के लिए एनजीटी ने प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से शासन ने कटने वाले पेड़ों की संख्या कम कर करीब 15 हजार कर दी गई। संशोधित परियोजना को एनजीटी में पेश किया गया।
एनजीटी ने परियोजना में भी कुछ संशोधन करने के आदेश दिए थे। इसके बाद रिवाइज्ड एस्टीमेट लोक निर्माण विभाग ने करीब दो माह पूर्व भेजा था। अब इस रिवाइज्ड प्रस्ताव को एनजीटी की ओर से मंजूरी मिल गई है। जिले में गंगनहर पटरी का करीब 13 किमी का हिस्सा आता है। रिवाइज्ड प्रस्ताव के अनुसार पटरी को दूसरी ओर से चौड़ा किया जाएगा।
इनमें एक ओर से वाहनों को निकाला जाएगा और दूसरी ओर से कांवड़ यात्रियों की यात्रा को जारी रखा जाएगा। सावन माह के दौरान कांवड़ यात्रियों को ही पटरी से जाने की अनुमति दी जाती थी। वहीं, वाहनों को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से रवाना किया जाता था। इसकी वजह से वाहन सवारों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस परियोजना के लागू होने के बाद अब पटरी का संचालन दोनों ओर से किया जाएगा। पटरी की एक दिशा से वाहनों का आवागमन जारी रहेगा और दूसरी ओर से कांवड़ यात्रा को निकाला जाएगा।
तीन साल से रोक की वजह से अटकी है परियोजना
गंगनहर पटरी परियोजना एनजीटी की रोक की वजह से करीब तीन साल से अटकी है। इसकी वजह से इस बार भी कांवड़ यात्रा के दौरान वाहनों को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का ही सहारा लेना पड़ेगा। वहीं, दोपहिया वाहनों को मेरठ के लिए मोदीनगर वाले रूट से निकाला जाएगा।
रामराजा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग ने बताया कि एनजीटी की रोक अब नहीं है। रिवाइज्ड इस्टीमेट बनाकर शासन को दो माह पूर्व भेज दिया गया था। इसमें कुछ संशोधन बताए गए थे, जिन्हें सही कर दिया गया है। अब बस शासनादेश जारी होने का इंतजार है। इस माह अगर आ जाता है तो अगस्त में कार्य शुरू कर दिया जाएगा।