बागपत। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार ने फर्जी रॉयल्टी (इंटर स्टेट ट्रांजिट पास) प्रकरण के आरोपी मेरठ, गाजियाबाद, बागपत के पांच लिपिकों और एक ठेकेदार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसमें 23 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
एसटीएफ के इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार ने 16 जून को बागपत कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि खनन सामग्री की फर्जी रॉयल्टी बनाने वाले गिरोह के सदस्य नईम, तालिब, फिरोज, आरिफ और लोनिवि के बाबू मंदीप को निवाड़ा गांव में छापामारी कर गिरफ्तार किया गया। इसमें बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर, कानपुर, गाजियाबाद और नोएडा के लोनिवि के 10 लिपिकों और ठेकेदारों सहित कुल 23 लोगों को नामजद कर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसमें वांछित मेरठ लोक निर्माण विभाग में तैनात लिपिक सुमित गुप्ता, विपिन भंडारी निवासी गायत्रीपुरम भोला रोड मेरठ, भीम प्रिय भानू निवासी रोशनपुर जिला मेरठ, बागपत में तैनात लिपिक मोनू खान निवासी शबगा, गाजियाबाद में तैनात लिपिक विशाल निवासी सेवानगर गाजियाबाद और संजय ठेकेदार निवासी पनवाड़ा जिला मेरठ ने न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर कराई। सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।