गाजियाबाद। ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाने के लिए आपूर्ति विभाग ने जिले के 146 डीजल-पेट्रोल और सीएनजी पंपों का सर्वे पूरा कर इसकी रिपोर्ट परिवहन विभाग को सौंप दी है। डीजल-पेट्रोल के 125 और सीएनजी के 21 पंप इसमें शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि अगले महीने यानी नवंबर के मध्य तक एएनपीआर कैमरे लगाने का काम पूरा कर दिया जाएगा।
आपूर्ति विभाग ने जीपीएस लोकेशन के साथ इसका सर्वे कराया है। एएनपीआर कैमरे लगने के बाद वाहन के पंप पर पहुंचते ही उसकी पीयूसीसी की वैधता का पता चलेगा। पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसीसी) की वैधता खत्म होने की स्थिति में वाहन का ऑटोमेटिक चालान होकर परिवहन विभाग के पोर्टल पर अपडेट होगा और इसकी सूचना वाहन स्वामी को भेजी जाएगी।
एक अक्तूबर को लागू हुआ था नियम :
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एक अक्तूबर से दिल्ली एनसीआर के पंपों पर नो पीयूसी-नो फ्यूल का नियम लागू किया था लेकिन जिले में पंपों पर एनपीआर कैमरे की सुविधा समय रहते नहीं कराई गई, जिसकी वजह से यह नियम यहां लागू नहीं हो सका। सितंबर के अंत में आपूर्ति विभाग ने एएनपीआर का विकल्प तैयार कराकर पंपों पर तैनात कर्मचारियों को एक विशेष एप डाउनलोड कराया। दावा किया गया है कि पंप कर्मचारी फोटो खींचकर वाहन के पीयूसीसी की वैधता की जांच करेगा। इसके बाद तेल, सीएनजी दी जाएगी लेकिन सर्वर फेल होने के कारण इस एप ने पहले दिन से ही काम नहीं किया। इसी बीच जब पंप स्वामियों पर विभागीय अफसरों ने अपने खर्चे पर पंपों पर कैमरे लगाने का दबाव बनाया तो पंप एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का रूख किया।
हाईकोर्ट ने पहली ही सुनवाई में इस पर स्टे लगा दिया और पंप एसोसिएशन को राहत दी। इसके बाद फिर परिवहन विभाग को ही एएनपीआर कैमरे लगाने के लिए आदेश दिए गए। जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने बताया कि शासन स्तर से निर्देश मिलने पर तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के सहयोग से सर्वे कराया गया था। रिपोर्ट परिवहन विभाग और मुख्यालय को भेज दी गई है।