दलालों और प्रॉपर्टी डीलरों पर शिकंजा कसने के लिए आवास विकास परिषद ने नया प्लान तैयार किया है। परिषद की ओर से आवंटित मकानों को पांच साल तक नहीं बेचा जा सकेगा। इतना ही नहीं परिषद हर साल फ्लैट में रहने वाले मूल आवंटी का वेरिफिकेशन भी करवाएगा।
परिषद की आगामी योजनाओं में यह नियम लागू होगा, जिससे सिर्फ वही लोग मकानों के लिए आवेदन करें जिनको जरूरत है।आवास विकास परिषद दिल्ली-सहारनपुर योजना में करीब 1100 ईडब्ल्यूएस बनाए हैं। इनका पजेशन अगले माह तक दिया जाएगा। पजेशन देने से पहले परिषद ने नया नियम बना दिया है।
जिन लोगों को यह आवंटित किया जाएगा वह अगले पांच साल तक इन्हें बेच नहीं सकेंगे। हर एक साल में आवंटी को परिषद कार्यालय आकर अपना पहचान पत्र जमा कराना होगा, जिससे यह साफ हो सके कि उसने मकान बेचा नहीं है। अगर वह वेरिफिकेशन के लिए नहीं आता तो मकान का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा।
आवास आयुक्त आरपी ने बताया कि हर सस्ती योजना में हजारों लोगों के साथ प्रॉपर्टी डीलर और दलाल भी आवेदन करते हैं। फ्लैट निकलने पर वे इन्हें महंगे दामों में बेचते हैं। इस कालाबाजारी को रोकने के लिए ही नए नियम लागू किए गए हैं। गलत आवेदन होने पर तुरंत आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
सबसे पहले मंडोला विहार की ईडब्ल्यूएस स्कीम में लागू होंगे नियम
सबसे पहले यह नियम मंडोला विहार में जल्द ही लांच होने जा रही ईडब्ल्यूएस योजना पर लागू होंगे। 1100 फ्लैटों की इस योजना में करीब 2500 आवेदन आए थे। परिषद अधिकारियों को शक है कि बड़ी संख्या में दलालों में इसमें आवेदन किया होगा। जो फ्लैटों को रजिस्ट्री के बाद बेचेंगे। इससे बचने के लिए नियम लागू किए गए हैं।
गलत मिली जानकारी तो तुरंत एफआईआर
परिषद अधिकारियों का कहना है कि अगर ईडब्ल्यूएस स्कीम के आवेदनों में किसी भी आवेदक द्वारा गलत जानकारी दी जाती है तो तुरंत एफआईआर की जाएगी। साथ ही आवेदन फॉर्म को तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा। सिद्धार्थ विहार में हुई गड़बड़ी को देखते हुए परिषद अधिकारी सख्त कदम उठाएंगे।